क्रिकेट से रिश्ते बेहतर बनाने की मुहिम

क्रिकेट
Image caption न्यूयॉर्क पुलिस को इससे दक्षिण एशियाई समाज तक पहुँच बढ़ाने में मदद मिल रही है

न्यूयॉर्क में अब पुलिस विभाग ने शहर में रहने वाले दक्षिण एशियाई मूल के लोगों के साथ बेहतर रिश्ते कायम करने के लिए नया तरीका अपनाया है.

अब विभिन्न समुदाय के लोगों में पहुंच बढ़ाने के लिए क्रिकेट के खेल का प्रयोग किया जा रहा है और इसमें पुलिस को कामयाबी भी मिलती नज़र आ रही है.

शहर के मैदानों में आजकल तकरीबन रोज़ाना ऐसे क्रिकेट मैच देखने को मिल जाते हैं जहां आईपीएल की तर्ज़ पर खिलाड़ी रंग बिरंगे कपड़े पहने हुए बल्ले और गेंद की द्वंद में लगे रहते हैं.

मैचों के दौरान युवा अमरीकी खिलाड़ी चौक्के और छक्के की मांग करते हुए चीख चीखकर अपने बल्लेबाज़ों का हौसला बढ़ाते रहते हैं.

लेकिन यह कोई आम मैच नहीं हैं, इनके पीछे एक मकसद है जो काम कर रहा है.

न्यूयॉर्क पुलिस डिपार्टमेंट या एनवाईपीडी युवा खिलाड़ियों की एक क्रिकेट लीग का आयोजन कर रहा है जिसके ज़रिए शहर में रहने वाले दक्षिण एशियाई लोगों के साथ पुलिस के रिश्ते बेहतर बनाने की कोशिश की जा रही है.

शहर में दक्षिण एशियाई यानी भारतीय, पाकिस्तानी और बांग्लादेशी मूल के लोगों की घनी आबादियां मौजूद हैं और इनकी संख्या भी बढ़ रही है.

पुलिस दक्षिण एशियाई मूल के युवाओं का भरोसा भी हासिल करना चाहती है और इसमें क्रिकेट एक अच्छा माध्यम साबित हो रहा है.

न्यूयॉर्क की एक टीम ड्रैगन्स के एक युवा खिलाड़ी हैं भारतीय मूल के शान मेहता और इन्हीं के साथी हैं पाकिस्तानी मूल के बिलाल शाहिद.

दोनों ही साथ में खेलते हैं और क्रिकेट में अमरीका की टीम में भी खेलना चाहते हैं. दोनों का ही मानना है कि पुलिस द्वारा शुरू की गई यह पहल काफ़ी अच्छा क़दम है.

शान मेहता कहते हैं, ''बहुत से लोग यहां समझते हैं कि पुलिस उनकी मदद नहीं करती बल्कि मुश्किलें पैदा करती है. यह बड़ी अच्छी बात है कि पुलिस विभाग ने यह क्रिकेट लीग शुरू की है जिससे विभिन्न समुदाओं के लोगों तक पहुंचने में पुलिस विभाग को आसानी हो रही है और गलतफहमियां भी दूर हो रही हैं.”

बिलाल शाहिद पुलिस के काम से खुश हैं और इसमे क्रिकेट की भी बेहतरी देखते हैं.

वो कहते हैं, “हमें बहुत अच्छा लग रहा है, पुलिस वाले हमारे लिए काफी काम कर रहे हैं. हमारे मैचों के लिए ग्राउंड तैयार करना, मैटिंग बिछाना, और हम लोगों को किट भी दी जाती है. हम सब कई अलग अलग देशों से आकर यहां रहने वाले लोग साथ में मिलकर खेल रहे हैं, मेलजोल भी बढ़ रहा है.

पुलिस की इस मुहिम का खासकर युवा मुसलमान भी निशाना हैं.

11 सितंबर के हमलों के बाद से मुसलिम समुदाय और पुलिस विभाग के बीच दूरी बढ़ती रही है और पुलिस विभाग ने इसीलिए खेल के ज़रिए इस समुदाए के करीब आने की कोशिश की है.

इसमें पाकिस्तानी मूल के एक पुलिस अफ़सर ताहिर जावेद ने भी किरदार निभाया है.

उन्होंने पुलिस कमिश्नर को सुझाया कि क्रिकेट न्यूयॉर्क में रहने वाले दक्षिण एशियाई मूल के युवाओं में काफ़ी लोकप्रिय है.

और इस खेल के सहारे युवाओं में पुलिस के प्रति विश्वास और यहां तक की हमदर्दी की भी भावना पैदा करने में मदद मिलेगी.

पुलिस विभाग ने क्रिकेट की लीग शुरू की और फिर क्या था देखते ही देखते 10 टीमों ने लीग मैच खेलने के लिए रजिस्ट्रेशन करा लिया.

इसमें 14 से 19 साल तक के लड़कों को शामिल किया गया है. अब इस टूर्नामेंट में कुल 170 खिलाड़ी खेल रहे हैं.

इस क्रिकेट लीग के एक आयोजक ताहिर जावेद कहते हैं,“हम लोग तो इस लीग के प्रति युवाओं के रूख़ से बहुत उत्साहित हैं. इन युवा खिलाड़ियों की पुलिस के बारे में गलतफ़हमियां भी दूर हो रही हैं. आम तौर पर यह युवा पुलिस से दूर ही रहते हैं, लेकिन इस लीग के ज़रिए इन्होंने देखा कि पुलिसवाले उनकी मदद कर रहे हैं, उनके लिए मैचों का आयोजन कर रहे हैं, खुद ही पुलिस की गाड़ियों में लड़कों को लाते ले जाते हैं, तो इनमें भी विश्वास बढ़ा है औऱ पुलिस की छवि भी बेहतर हुई है.”

पुलिस का काम आसान

यह कार्यक्रम पिछले साल शुरू किया गया था, लेकिन इस साल इसमें बहुत तेज़ी आई है.

Image caption दक्षिण एशियाई मूल के लोगों में इस पहल से उत्साह है

इस वर्ष ट्वेंटी 20 क्रिकेट मैचों के इस टूर्नामेंट में भारतीय, पाकिस्तानी, बांग्लादेशी और वेस्टइंडीज़ के देशों के मूल के युवा खिलाड़ी इसमें बढ़ चढ़ कर हिस्सा ले रहे हैं.

गर्मियों की छुट्टियां चल रही हैं और स्कूल बंद हैं इसलिए इस खेल में लगे हुए यह युवा किसी गलत गतिविधियों में शामिल होने से भी बच जाते हैं. इससे भी पुलिस का काम आसान होता है.

अमरीका में वैसे तो बेसबॉल राजा है और क्रिकेट को कम ही जाना जाता है और यही कारण है कि शहर में क्रिकेट खेलने के लिए उपयुक्त मैदानों की भी भारी कमी है.

लेकिन फिर भी पुलिस विभाग अपने तौर पर मैदानों को खोजकर वहां क्रिकेट के लिए कुछ हद तक हालात बेहतर बनाने की कोशिश कर रहा है.

इस लीग में शामिल टीमों के नाम भी बेसबॉल की टीमों की ही तरह रखे जाते हैं.

सुपरस्टार्स, वॉरियर्स, ड्रैगन्स, वेस्टइंडीज़ किंग्स, और इन्हीं के साथ पंजाब और पाक ब्राइटन जैसी टीमें भी शामिल हैं.

लेकिन क्रिकेट के लिए अमरीका कोई अंजान जगह नहीं है बल्कि इतिहास के पन्ने बताते हैं कि 1844 में दुनिया का सबसे पहला एकदिवसीय मैच अमरीका और कनाडा के बीच यहीं न्यूयॉर्क में ही खेला गया था.

यह और बात है कि उस मैच में कनाडा के हाथों अमरीका को शिकस्त का मुंह देखना पड़ा था.

बहरहाल, क्रिकेट की अब थोड़ी बहुत चर्चा होने लगी है. इस नई मुहिम का आयोजन करने वाले एक पुलिस अफ़सर अमीन कोसायम बताते हैं कि अब अमरीकी लोग बेसबॉल जैसे दिखने वाले इस खेल के बारे में उत्सुक्ता से पूछते हैं.

कोसायम कहते हैं,“आपको हैरत होगी कि लोग रास्ता चलते गाड़ी रोककर मैदान पर आते हैं, क्रिकेट देखते हैं और उसके बारे में जानना चाहते हैं. उनको पहले तो लगता है कि यह बेसबॉल खेला जा रहा है लेकिन हम उन्हे क्रिकेट के बारे में बताते हैं. तो यह भी बड़ा अच्छा लगता है कि आम लोगों को क्रिकेट के बारे में जानकारी हो रही है.”

लीग मैचों में खेलने वाली टीमों के युवा खिलाड़ियों को भारतीय आई पी एल की तरह ही रंग बिरंगे यूनिफ़ार्म भी पहनने को दिए जाते हैं जिससे उनके उत्साह में भी बढ़ावा होता है.

और खिलाड़ियों को पैंट, जर्सी, कैप और क्रिकेट के अन्य साज़ो-सामान मुफ़्त में दिए जाते हैं.

इनमें से बहुत से खिलाड़ी अच्छे स्तर की और सही तकनीक की क्रिकेट भी खेलते हैं.

इसलिए अमरीका की नेशनल टीम और न्यूयॉर्क के राज्य स्तर की भी टीमों के लिए इनमें से लड़के चुनने के मकसद से कई चयनकर्ता अपनी पैनी निगाह रखते हैं और अच्छे खिलाड़ियों के खेल को गौर से देखते हैं.

खिलाड़ियों पर नज़र

लेस्टर हूपर, न्यूयॉर्क ज़ोन की टीम के मैनेजर हैं. वो भी मैदान पर मौजूद थे और अच्छे खिलाड़ियों पर खासकर नज़र रखे हुए थे.

वो कहते हैं,“हमने इसी तरह के मैचों से कई अच्छे खिलाड़ी चुनकर उनहे आगे बढ़ने में मदद की है. और हम लोग यहां भी इस लीग के मैचों में खिलाड़ियों को चुनने का काम जारी रखे हैं. इनमें से कुछ खिलाड़ियों पर हमने खास तौर पर नज़र रखी हुई है और उन्हें आगे प्रशिक्षण और कोचिंग का काम जारी रखा जाएगा. ”

इस क्रिकेट लीग में खेलने वाले युवाओं से पुलिस को भी कुछ और उम्मीदें हैं. इस लीग का मकसद भले ही यह न बताया गया हो लेकिन इन युवाओं को पुलिस में भर्ती होने के लिए प्रेरणा से खुद पुलिस भी इनकार नहीं करती है.

पुलिस अफ़सर ताहिर जावेद कहते हैं,“जब दक्षिण एशियाई देशों से यहां लोग आते हैं तो पुलिस को भी अलग नज़र से देखते हैं. अब इस तरह के कार्यक्रमों के ज़रिए पुलिस विभाग के बारे में भी इनकी राय बदलेगी. और हो सकता है कि इन युवाओं में से कुछ पुलिस में भर्ती भी होना चाहें. मैं तो समझता हूं कि हमारे समुदाओं से और लोग पुलिस में भर्ती होने चाहिए.”

ख्याल तो अच्छा है और कुछ युवा इस कैरियर के बारे में गंभीरता से सोच भी सकते हैं. लेकिन फ़िलहाल तो यह युवा खिलाड़ी अपनी टीमों को जीत दिलाने के लिए जी जान लगाए हुए हैं.

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