बीयर के लिए कोड़ों की सज़ा टली

कार्तिका सारी देवी शुकर्णो
Image caption कार्तिका शुकर्णो ने अपराध स्वीकार करते हुए कहा है कि वे अदालत का सम्मान करती हैं

मलेशिया में बीयर पीने के लिए एक महिला को कोड़े मारने की सज़ा रमज़ान पूरा होने तक टाल दी गई है.

मलेशिया में पहली बार किसी महिला को इस तरह के आरोप में ऐसी सज़ा दी गई थी.

32 वर्षीय मुस्लिम महिला कार्तिका सारी देवी शु्कर्णो ने सार्वजनिक स्थल पर शराब पीने की बात स्वीकार की थी जिसके बाद इस्लामी अदालत ने उसे इस सप्ताह छह बार कोड़े मारने की सज़ा सुनाई थी.

इस सज़ा को लेकर मलेशिया में बहुत विवाद पैदा हुआ था. रूढ़िवादी मुसलमानों ने इस सज़ा का स्वागत किया था मगर देश-विदेश में रहने वाले ग़ैर मुस्लिम लोग इसका विरोध कर रहे थे.

मलेशिया में मुस्लिम और ग़ैर मुस्लिम लोगों के लिए अलग अलग अदालते है. वहाँ बहुसंख्यक मलय समुदाय के लोगों के लिए इस्लामी अदालतें हैं जबकि चीनी और भारतीय अल्पसंख्यकों के लिए दूसरी अदालतें.

मानवाधिकार संस्था एमनेस्टी इंटरनेशनल ने मलेशियाई अधिकारियों से सज़ा माफ़ करने और कोड़े मारने की सज़ा समाप्त करने की अपील की थी.

मामला

कार्तिका शुकर्णो को पिछले साल एक होटल में बीयर पीते समय गिरफ्तार किया गया था. एक प्रशिक्षित नर्स और दो बच्चों की माँ शुकार्णो ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया.

बाद में न्यायालय ने उन्हें कोड़े मारने की सज़ा देते हुए कहा कि उन्हें ऐसी कड़ी सज़ा इसलिए दी जा रही है ताकि ये घटना एक उदाहरण बन सके.

सोमवार को उनको उनके घर से गिरफ़्तार कर लिया गया ताकि उनको हिरासत में रखकर इस सप्ताह कोड़े मारे जाएँ.

शुकर्णो ने पिछले सप्ताह अपील की थी उनको कोड़े मारने की सज़ा सार्वजनिक रूप से दी जाए.

उन्होंने कहा था कि वे बिल्कुल संयत हैं और वे इस फ़ैसले और अदालत का सम्मान करती हैं.

मगर अंतिम समय में धार्मिक मामलों के एक प्रभारी मोहम्मद सहफ़री अब्दुल अज़ीज़ ने हस्तक्षेप कर इस सज़ा को रमज़ान का महीना ख़त्म होने तक टाल दिया.

समझा जाता है कि सज़ा टालने का फ़ैसला एटर्नी जेनरल की सलाह पर दया दिखाने के उद्देश्य से किया गया है.

शुकर्णो को अब ये सज़ा सितंबर के मध्य में दी जा सकती है.

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