सीनेटर एड्वर्ड कैनेडी का निधन

एडवर्ड कैनेडी
Image caption एडवर्ड कैनेडी सात बार सीनेट के लिए चुन गए

मैसाच्युसेट्स से सीनेटर एड्वर्ड कैनेडी का निधन हो गया है. वो 77 वर्ष के थे और ब्रेन ट्यूमर से पीड़ित थे.

बुधवार तड़के कैनेडी परिवार ने उनकी मृत्यु की घोषणा की. उन्हें 'टेड' कह कर पुकारा जाता था.

एड्वर्ड कैनेडी पिछले करीब 50 वर्षों से सीनेट में स्वास्थ्य कल्याण और नागरिक अधिकार जैसे कई मुद्दों पर मुखर रहे थे.

लेकिन जहाँ तक अमरीका की जनता का सवाल है, एड्वर्ड कैनेडी मशहूर कैनेडी परिवार के सदस्य थे.

एड्वर्ड कैनेडी चार भाइयों में अकेले थे जिनकी स्वाभाविक मौत हुई. उनके दो भाइयों को हत्या कर दी गई थी.

उनके भाई जोज़ेफ़ की द्वितीय विश्व युद्ध में हवाई दुर्घटना में मौत हो गई थी, जबकि राष्ट्रपति जॉन एफ़ कैनेडी और राष्ट्रपति पद के दावेदार रॉबर्ट एफ़ कैनेडी की हत्या कर दी गई थी.

एडवर्ड कैनेडी वर्ष 1962 में सीनेट के सदस्य बने जब उन्होंने अपने भाई जॉन एफ़ कैनेडी की जगह ली. जॉन एफ़ कैनेडी ने अमरीका के राष्ट्रपति पद को संभालने के लिए सीनेटर के पद से इस्तीफ़ा दे दिया था.

ओबामा के समर्थक

एड्वर्ड कैनेडी को सीनेट के लिए सात बार चुना गया. वो राष्ट्रपति बराक ओबामा के सक्रिय समर्थक थे.

खुद एड्वर्ड कैनेडी के राष्ट्रपति पद की उम्मीदों को उस वक्त बुरी तरह झटका लगा था जब वर्ष 1969 में उन्हें मैसाच्युसेट्स द्वीप में एक दुर्घटना के बारे में अधिकारियों को नहीं बताने और वहाँ से भागने पर सज़ा सुनाई गई, हालांकि बाद में उस सज़ा को निलंबित कर दिया गया था.

एड्वर्ड कैनेडी ने वर्ष 1980 में डेमोक्रेटिक पार्टी के राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के लिए कोशिश की, लेकिन वो जिमी कार्टर से हार गए.

जब एड्वर्ड कैनेडी ने 1962 में पहली बार सीनेटर का पद संभाला तो राजनीतिक तौर पर उन्हें बहुत महत्व नहीं दिया गया और कहा गया कि उन्हें ये पद एक प्रसिद्ध परिवार का सदस्य होने की वजह से मिला है.

लेकिन अपने क़रीब पचास वर्षों के कार्यकाल के दौरान एड्वर्ड कैनेडी की गिनती वॉशिंगटन के सबसे असरदार सीनेटरों में होती है.

उन्होंने दोनों ही पार्टियों, डेमोक्रेटिक और रिपब्लिकन के राष्ट्रपतियों के साथ काम किया.

एड्वर्ड कैनेडी उदारवादी विचारधारा के थे जिसे कई डेमोक्रेट्स बीते वक्त की विचारधारा मानते हैं.

अपनी उदारवादी विचारधारा की वजह से एड्वर्ड कैनेडी को कई बार रूढिवादी विचारधारा के लोगों के गुस्से का भी सामना करना पड़ा.

उन्होंने नागरिक और मज़दूर अधिकारों की सुरक्षा, स्वास्थ्य सेवा के विस्तार, स्कूलों के स्तर को सुधारने, छात्रों के लिए सुविधाओं को बढ़ाने और परमाणु हथियारों के विस्तार को रोकने जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर काम किया.

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