असम में वरिष्ठ अल्फ़ा कमांडर की मौत

असम सुरक्षा बल
Image caption असम में सुरक्षा बलों ने अलगाववादी संगठनों के ख़िलाफ़ कार्रवाई तेज़ कर दी है

असम के अलगाववादी संगठन यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ़ असम यानी अल्फ़ा के एक वरिष्ठ कमांडर की सुरक्षाबलों के साथ भिड़ंत में मौत हो गई है.

असम पुलिस और सेना के एक संयुक्त दल को ये सूचना मिली थी कि अल्फ़ा के वरिष्ठ कमांडर प्रणय राय उर्फ मनोरंजन पश्चिमी ज़िले कोकराझार के तिलापाड़ा गांव में छुपे हुए हैं.

सूचना मिलने के बाद शुक्रवार की शाम इस दल ने तिलपाड़ा गांव को घेरे में ले लिया.

कोकराझार के ज़िला पुलिस अधीक्षक पी के दत्ता ने शनिवार को एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि सुरक्षाबलों के साथ हुई गंभीर झड़पों में गोली लगने से राय की मौत हुई.

अधिकारियों का कहना है कि राय के पास से कुछ हथियार, गोला बारूद और एक सैटलाइट फ़ोन भी बरामद हुआ.

प्रणय राय अल्फ़ा की उस 709वीं बटालियन के उप कमांडर थे, जो असम के पश्चिमी और केंद्रीय ज़िलों में सक्रिय है.

धमाकों की योजना

पुलिस अधीक्षक पीके दत्ता ने बताया कि इसी महीने आने वाले दुर्गापूजा के त्यौहार के मौक़े पर राय की ज़बरदस्त धमाके करने की योजना थी.

पुलिस अधीक्षक का कहना था कि अल्फ़ा के नेताओं के साथ राय की बातचीत को पुलिस ने सुन लिया था जिससे ये पता चला कि राय को दुर्गा पूजा के मौक़े पर भारी धमाके करने के आदेश मिले हैं.

पुलिस और सेना ने असम के पृथकतावादी गुटों के ख़िलाफ इसी साल मई में ही अभियान तेज़ कर दिया था.

खुफ़िया एजेंसियों की रिपोर्टों मे कहा गया कि बांग्लादेश में भारत विरोधी अलगाववादी गुटों की धर पकड़ शुरू होते ही कई विद्रोही असम में घुसपैठ कर चुके हैं.

भारत पहले से ये कहता रहा है कि उत्तर पूर्व के बहुत से अलगाववादी गुट कई सालों से बांग्लादेश में ठिकाने बनाए हुए हैं.

बांग्लादेश की अवामी लीग के नेतृत्व वाली सरकार ने जनवरी में सत्ता संभालने के बाद इन पृथकतावादी गुटों पर शिकंजा कसने का वादा किया था.

उसके बाद से अल्फ़ा के प्रमुख कमांडर परेश बरुआ समेत कई अलगाववादी नेताओं को सरकार ने हथियारों की तस्करी के आरोपों में पकड़ा है.

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