'पारदर्शिता और जवाबदेही ज़रुरी'

बराक ओबामा
Image caption ओबामा ने नए वित्तीय सुधारों के तहत नए नियमों की घोषणा की है

अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने अमरीकी वित्तीय प्रणाली में और सुधार का वादा किया है और कहा है कि आर्थिक संकट के एक साल बाद भी इस तंत्र में कुछ ऐसे हिस्से है जिन्होंने सबक नहीं सीखा है.

उनका कहना था कि आर्थिक संकट को देखते हुए बाज़ार और अर्थव्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही तय करने की ज़रुरत है.

राष्ट्रपति ने कांग्रेस से अपील की कि वो इसी वर्ष जल्द से जल्द वित्तीय सुधार संबंधी क़ानून को पारित करें.

ओबामा का कहना था कि वो मुक्त बाज़ार के पैरोकार हैं और वित्तीय सुधार संबंधी क़ानून के ज़रिए वित्तीय परिस्थितियां बेहतर हो सकेंगी.

राष्ट्रपति का कहना था कि अर्थव्यवस्था में सुधार है लेकिन अभी भी सरकारी मदद की ज़रुरत है और सरकार कई स्तर पर वित्तीय सुधारों से जुड़ी रहेगी.

साल भर पहले अमरीका का सबसे बड़ा बैंक लेहमैन ब्रदर्स दिवालिया हो गया था और कई बड़ी कंपनियों की स्थिति ख़राब हो गई थी.

इंश्योरेंस कंपनी एआईजी, फैनी मे और फ्रैडी मैक समेत कई कंपनियां डूबी और साथ ही लोगों का पैसा भी डूबा.

राष्ट्रपति ने कहा कि दोबारा ऐसे हालात पैदा न हों इसके लिए कड़े नियम बनाने की ज़रुरत है.

उन्होंने कहा कि अमरीकी कांग्रेस जल्दी ही उपभोक्ता की मदद के लिए कंज्यूमर्स फाइनेंसियल प्रोटेक्शन एजेंसी बनाएगी जो इस बात पर नज़र रखेगा कि उपभोक्ताओं को क्या दिया जा रहा है और इस संबंध में उन्हें पूरी जानकारी मिल रही है या नहीं.

ओबामा का कहना था कि अमरीकी जनता से भी ग़लती हुई है. जनता ने बिना नियमों को पढ़े क्रेडिट कार्ड लिए और बाद में पैसे जमा नहीं कर पाए लेकिन इसके लिए कंपनियां भी ज़िम्मेदार हैं जिन्होंने पारदर्शिता से पूरी जानकारी नहीं दी.

राष्ट्रपति का कहना था कि पूर्व में क़ानून स्पष्ट नहीं होने के कारण कई ग़लतियां हुई हैं.

उन्होंने कहा कि वित्तीय प्रणाली में जो खामियां हैं उन्हें दूर किया जाना ज़रुरी है और साथ ही ऐसे नियम बनाने की ज़रुरत है जिससे बड़े फर्म इतना बड़ा रिस्क न लें कि वो रिस्क उन्हें ले डूबें.

राष्ट्रपति का कहना था कि सामान्य ज्ञान के ज़रिए सीधे नियम बनाए जाने चाहिए तभी सभी का भला होगा.

उनका कहना था कि साल भर पहले जो हुआ वो सिर्फ़ क़ानूनों की असफलता नहीं थी बल्कि ज़िम्मेदारी लेने में असफलता का परिणाम थी जिसके कारण अमरीका ही नहीं पूरा विश्व इतनी बड़ी समस्या को झेल रहा है.

ओबामा का कहना था कि अब समय आ गया है कि वित्तीय संस्थान ज़िम्मेदारी लें क्योंकि क़ानून बन जाने के बाद भी वित्तीय प्रणाली तब तक नहीं सुधरेगी जब तक लोगों का विश्वास इन संस्थाओं में नहीं बढ़ेगा और ये तब तक नहीं होगा जब तक वित्तीय संस्थान ज़िम्मेदारी को नहीं समझेंगे.

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