ईद की छुट्टियों पर विवाद

न्यूयॉर्क में रहने वाले मुसलमान शहर प्रशासन से स्कूलों में ईद की छुट्टियों की मांग कर रहे हैं. लेकिन शहर के मेयर माइकल ब्लूमबर्ग ने स्कूलों में ईद की छुट्टियां दिए जाने से इनकार कर दिया है.

Image caption कई बच्चों को ईद के कारण स्कूल छोड़ना पड़ता है

अब शहर भर के मुसलमान मेयर से इस मुददे पर नाराज़ हैं और बहस कर रहे हैं. छुट्टियों की मांग को लेकर मुहिम तेज़ हो गई है.

न्यूयॉर्क शहर में मुसलमानों की आबादी अच्छी-ख़ासी है और एक अंदाज़े के मुताबिक़ क़रीब एक लाख 10 हज़ार मुस्लिम छात्र शहर के स्कूलों में पढ़ते हैं.

लेकिन इन बच्चों को रमज़ान के बाद आने वाली ईद और बक़रीद के लिए स्कूलों से छुट्टी नहीं मिलती और बहुत से बच्चों को इन अहम त्यौहारों के दिन भी स्कूल जाना पड़ता है.

अब इन बच्चों के माता-पिता और अन्य लोग मिलकर शहर प्रशासन से मांग कर रहे हैं कि सरकारी स्कूलों में ईद की छुट्टियाँ होनी चाहिए, जिससे बच्चों को स्कूल और त्यौहार के बीच किसी एक को चुनने पर मजबूर न होना पड़े.

पिछले तीन साल से शहर में सक्रिय मुस्लिम संस्थाएँ इस मुददे पर ज़ोर दे रही थीं कि शहर काउंसिल एक प्रस्ताव पारित करे, जिससे ईद और बक़रीद के त्यौहारों पर शहर के स्कूलों को बंद रखा जाए और मुस्लिम छात्र त्यौहार मना सकें.

प्रस्ताव

मुस्लिम संगठनों और शहरियों के लगातार दबाव के कारण इस साल जून की 30 तारीख़ को शहर काउंसिल ने इस मुददे पर वोटिंग कर भारी बहुमत से प्रस्ताव पारित भी किया.

51 सीटों के सदन में 50 वोट ईद के त्यौहारों के दिन स्कूलों में छुट्टी के प्रस्ताव के हक़ में थे.

लेकिन शहर के मेयर माइकल ब्लूमबर्ग को स्कूलों के मामले में आख़िरी फ़ैसला लेने का हक़ है और सिटी काउंसिल के प्रस्ताव भी उनको बाध्य नहीं कर सकते.

इसलिए अब यह मेयर के ही हाथ में है कि वह स्कूलों को ईद के लिए बंद करने का आदेश दें या न दें.

लेकिन मेयर ब्लूमबर्ग ने स्पष्ट रूप से कह दिया है कि वह स्कूलों में ईद के त्यौहारों के लिए छुट्टियाँ नहीं देंगे.

अपने फ़ैसले पर मेयर ब्लूमबर्ग कहते हैं, "देखिए, न्यूयॉर्क बहुत बड़ा शहर है और यहाँ दुनिया भर के बहुत से धर्मों और देशों के लोग आकर रहते हैं. अगर हम सभी धर्मों के त्यौहारों के लिए स्कूलों में छुट्टियाँ देने लगें तो स्कूल तो चल ही नहीं पाएंगे."

नाराज़गी

लेकिन मेयर के इस फ़ैसले से मुसलमान बेहद नाराज़ हैं और मुस्लिम समुदाय ने मेयर के तर्क को नकार दिया है.

Image caption छुट्टियों की मांग पर लोग सड़क पर उतर गए हैं

उनका कहना है कि अगर ईसाई और यहूदी धार्मिक त्यौहारों जैसे क्रिसमस और हानुका या योम किपूर के लिए स्कूलों में छुट्टियाँ हो सकती हैं तो मुस्लिम त्यौहारों के लिए क्यों नहीं.

ख़ुर्शीद ख़ान न्यूयॉर्क में क़रीब 30 साल से रह रहे हैं. वह कहते हैं कि मेयर इस मुददे पर गलत हैं.

ख़ुर्शीद ख़ान ने कहा, "दूसरे धर्मों के लिए जैसे ईसाई और यहूदी त्यौहारों के लिए तो साल भर में कई दिनों की छुट्टियां दी जाती हैं, तो ईद के लिए दो दिन की छुट्टी देने में कौन सा पहाड़ टूट पड़ेगा. अच्छी बात यह है कि इस मांग में ईसाई और यहूदी सभी हमारा साथ दे रहे हैं."

संगठित मुहिम

अब मुसलमानों ने न्यूयॉर्क शहर के स्कूलों में ईद और बक़रीद के दिन छुट्टियों की मांग को लेकर संगठित तौर पर शहर प्रशासन पर दबाव बनाने की कोशिश करनी शुरू कर दी है.

कोअलिशन फ़ॉर मुस्लिम स्कूल हॉलीडेज़ नाम का एक संगठन बनाया गया है जिसमें शहर भर के 80 से ज़्यादा विभिन्न संगठन शामिल हैं, जिनमें मुस्लिम और ग़ैर-मुस्लिम दोनों हैं.

अब यह संगठन शहर काउंसिल के अलावा न्यूयॉर्क राज्य असेंबली में राजनीतिक प्रतिनिधियों को इस बात पर राज़ी करने की कोशिश कर रहा है कि मुसलमानों के त्यौहारों के दिन स्कूलों में छुट्टियाँ होनी चाहिए.

अब इसके लिए राज्य की असेंबली में भी प्रस्ताव पारित करने की मांग हो रही है.

लेकिन यह सिर्फ़ मुसलमानों के त्यौहारों का ही मामला नहीं है. शहर में हिंदू और सिख समुदाय के लोग भी रहते हैं और उनको भी दीपावली और गुरू नानक दिवस जैसे त्यौहारों के दिन स्कूलों में छुट्टियाँ न दिए जाने से इसी तरह की परेशानियाँ होती हैं.

लेकिन अभी इन समुदायों की ओर से इसलिए मांग नहीं की जा रही है क्योंकि शहर के स्कूलों में हिंदू और सिख छात्रों की संख्या कम है.

वर्ष 2006 में ठीक ईद के दिन ही स्कूलों में परीक्षा भी रखी गई थी जिससे बहुत से छात्रों को मुश्किलें हुई थी. उस समय राज्य असेंबली ने इस मामले में एक प्रस्ताव पारित कर स्कूलों पर इन त्यौहारों के दौरान परीक्षा रखने पर प्रतिबंध लगा दिया था.

फ़ैसला

ब्रुकलिन में रहने वाली इज़ाबेल बुकारेम लेबनानी मूल की मुसलमान महिला हैं. इज़ाबेल को भी अपने दो छोटे बच्चों को ईद के दिन स्कूल भेजने या न भेजने का फ़ैसला करना पड़ता है.

इज़ाबेल कहती हैं, "हमारे बच्चे अपने स्कूलों से बहुत जुड़े रहते हैं. इसलिए जब हमारे धार्मिक त्यौहार होते हैं तो उन दिनों में अगर स्कूल में छुट्टी नहीं होती तो हम दुविधा में पड़ जाते हैं कि स्कूल न भेजें तो नुक़सान होता है और त्यौहार के दिन घरवालों के साथ त्यौहार मनाना भी हमारे लिए बहुत मायने रखता है."

इज़ाबेल बताती हैं कि अगर ईद के दिनों में बच्चे स्कूल नहीं जाते हैं तो उनको अहम परीक्षाएँ तक छोड़नी पड़ जाती हैं और बच्चे कई अहम सबक नहीं ले पाते हैं.

इस मुद्दे पर हाल में ही मेयर के दफ़्तर के सामने एक रैली का आयोजन किया गया था. जिसमें बच्चे भी अपने माता पिता के साथ ईद की छुट्टियों की मांग करने पहुँचे थे.अब इस मुद्दे को लेकर मुसलमानों ने आने वाले आम चुनाव में मेयर का विरोध करने की भी बात शुरू कर दी है.

मेयर माइकल ब्लूमबर्ग को नवंबर में तीसरी बार शहर के मेयर चुने जाने के लिए आम चुनाव का भी सामना करना है और इसलिए उन पर हर समुदाय को मनाने का भी दबाव है.

अब न्यूयॉर्क के मुसलमान यही उम्मीद कर रहे हैं कि उनके बच्चों के स्कूल भी ईद के रोज़ बंद रहें जिससे ईद और बकरीद के त्यौहारों का सही ढंग से लुत्फ़ उठाया जा सके.

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