पानीपत में हैज़े से छह की मौत

हैज़े के मरीज़

राजधानी दिल्ली से लगे हरियाणा के पानीपत शहर में हैज़े और आंत्रशोथ से छह लोगों की मौत हो गई है और 100 से ज़्यादा लोग अभी भी शहर के अलग अलग अस्पतालों मे इलाज़ के लिए भर्ती हैं.

शहर की बत्रा कॉलोनी में इस बीमारी का सबसे ज़्यादा असर बताया गया है, जहां से अभी भी बड़ी संख्या में लोग बीमार होकर अस्पतालों में पहुंच रहे हैं. ज़िले के चिकित्सा अधिकारी अभी भी स्थिति को नियंत्रण में नहीं बता रहे हैं.

ज़िले के मुख्य चिकित्सा अधिकारी आरआर पुनिया ने बीबीसी को बताया कि इस बीमारी के फैलने का कारण शायद प्रदूषित पानी की सप्लाई है. उनके अनुसार ऐसा लगता है कि इस कॉलोनी में पानी की सप्लाई में सीवेज़ लाईन मिल गई जिससे ये बीमारी अचानक फूट पड़ी.

पुनिया का कहना है कि प्रशासन ने संकट से निपटने के लिए कई कदम उठाए हैं, उनके अनुसार जिस इलाक़े में ये बीमारी फैली है वहां अब टैकरों से साफ़ पानी सप्लाई किया जा रहा है. साथ ही ऐसी गोलियां भी बांटी जा रही हैं जिन्हें पीने के पानी में डाला जाता है.

बीमार लोगों के लिए अस्पतालों में विशेष व्यवस्था की गई है और जिन इलाक़ों में इस बीमारी का प्रकोप है वहां मुफ्त ओआरएस यानी जीवन रक्षक घोल बांटा जा रहा है.

चिकित्सा प्रशासन के अनुसार अभी तक सरकारी अस्पताल में 67 लोग भर्ती हुए थे जिनमें से 20 लोगों को इलाज़ के बाद छुट्टी दे दी गई. लेकिन प्रशासन मानता है की बहुत सारे ऐसे लोग हैं जो निजी अस्पतालों में इलाज के लिए गए हैं.

हैज़े से मौत का कारण बताते हुए चिकित्सा अधिकारी का कहना था की लोगों ने बीमारी की गंभीरता को नहीं समझा और इलाज़ में देरी करने से मौतें हुई हैं लेकिन अस्पताल मे भर्ती लोगों ने बीबीसी से बातचीत में प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया है.

उमा देवी जिनका नौ साल का बेटा पप्पू ज़िले के सरकारी अस्पताल में भर्ती है, का कहना था कि उन्हें ये किसी ने नहीं बताया की ये बीमारी सरकारी सप्लाई से आने वाले पानी से फैल रही है. प्रशासन के उपायों के दावों पर वो कहती हैं कि उन्हें प्रशासन के किसी दावे की जानकारी नहीं है और अभी भी लोग दूषित पानी पीने को मजबूर हैं.

बीबीसी से बातचीत से एक घंटे पहले ही भर्ती हुए रीतेश, जिनकी उम्र 19 साल है का कहना था की उन्हें अचानक उल्टी और दस्त शुरु हो गए जिसके बाद वो अस्पताल भागे. उनका भी कहना था कि प्रशासन ने जो दावे किए हैं उनपर अमल नहीं हो रहा है. उनके अनुसार उन्होंने पूरी कॉलोनी में कहीं कोई दवा बंटते नहीं देखी और न ही किसी से सुना.

स्थानीय पत्रकार सुरेंद्र मलिक के अनुसार प्रशासन ने समस्या को उस समय तक गंभीरता से नहीं लिया जब तक इस बीमारी से कई मौतें नहीं हो गईं. उनके अनुसार कई मौते ऐसी हैं जिनमें न कोई पोस्टमार्टम हुआ और ना ही वो सरकारी रिकार्ड में हैज़े से हुई मौत के रुप मे दर्ज की गईं.

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