अफ़ग़ानिस्तान मिशन पर जनरल की चेतावनी

अफ़ग़ानिस्तान में अमरीकी सैनिक
Image caption जनरल का कहना है कि विदेशी सेनाओं को अपेक्षित परिणाम नहीं मिल रहे हैं

अफ़ग़ानिस्तान में अमरीका के शीर्ष जनरल स्टैनल मैक्रिस्टल ने आगाह किया है कि अगर वहाँ तालेबान के ख़िलाफ़ लड़ाई के लिए अतिरिक्त अमरीकी सैनिक नहीं भेजे गए तो इस बात की बहुत संभावना है कि अमरीकी मिशन विफल हो जाए.

जनरल स्टैनली मैक्रिस्टल ने यह आकलन अपनी उस गोपनीय रिपोर्ट में पेश किया है जो अमरीकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन को भेजी है और जिसकी प्रति वॉशिंगटन पोस्ट ने हासिल की है.

जनरल स्टैनली मैक्रिस्टल ने हाल ही में कहा था कि अफ़ग़ानिस्तान में मौजूदा अमरीकी रणनीति कामयाब साबित नहीं हो रही इसलिए उन्होंने अमरीकी सैन्य रणनीति में बदलाव का आह्वान किया था.

मई 2009 से अभी तक लगभग 30 हज़ार अतिरिक्त अमरीकी सैनिक अफ़ग़ानिस्तान में भेजे जा चुके हैं. जिसके बाद वहाँ तैनात अमरीकी सैनिकों की संख्या लगभग दोगुनी हो चुकी है.

वर्ष 2009 के अंत तक अफ़ग़ानिस्तान में अमरीकी सैनिकों की संख्या बढ़ाकर 68 हज़ार करने का प्रस्ताव है.

समाचार पत्र वाशिंगटन पोस्ट ने जनरल स्टैनली मैक्रिस्टल के आकलन की जो रिपोर्ट प्रकाशित की है उसमें कहा गया है, "अगले लगभग एक वर्ष के दौरान बढ़त हासिल करने और विद्रोही आंदोलन को पीछे धकेलने में नाकामी की वजह से ऐसे नतीजे हासिल होने का ख़तरा है जिनसे विद्रोही गतिविधियों को हरा पाना संभव नहीं हो पाएगा."

जनरल स्टैनली मैक्रिस्टल ने आगाह किया कि संसाधनों की कमी नाकामी की एक वजह हो सकती है. उन्होंने कहा, "अतिरिक्त संसाधानों की तुरंत ज़रूरत है."

संभावना जताई गई है कि जनरल स्टैनली मैक्रिस्टल अफ़ग़ानिस्तान में अमरीकी सैनिकों की संख्या कई हज़ार में बढ़ाने के लिए अलग से अनुरोध करने वाले हैं, साथ ही उन्होंने कहा है कि अफ़ग़ान सुरक्षा बलों को दिया जाने वाला प्रशिक्षण तेज़ किए जाने की ज़रूरत है.

उन्होंने कहा है, "अगर अतिरिक्त संसाधन नहीं उपलब्ध कराए जा सके तो इससे यह लड़ाई और लंबी खिंच सकती है जिसमें ज़्यादा मौतें होंगी और कुल ख़र्च बढ़ेगा और इस तरह अंततः राजनीतिक समर्थन कम होता चला जाएगा. इनमें से अगर कोई भी जोखिम बरक़रार रहा तो परिणामस्वरूप अफ़ग़ानिस्तान मिशन ही नाकाम हो जाएगा."

लेकिन उन्होंने ये भी कहा है कि सैनिकों की संख्या में कोई भी बढ़ोत्तरी अफ़ग़ानिस्तान में बदली हुई सैनिक रणनीति के अनुसार ही होनी चाहिए.

जनरल स्टैनली मैक्रिस्टल ने लगातार ऐसी सैनिक रणनीति की हिमायत की है जिसमें अफ़ग़ान लोगों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए.

उन्होंने अपनी रिपोर्ट में नैटो सैनिकों की इस बात के लिए आलोचना की है कि वे अफ़ग़ान लोगों की सुरक्षा पर ध्यान देने के बजाय विद्रोही गतिविधियों पर ही ज़्यादा ध्यान दे रही हैं.

जनरल स्टैनली मैक्रिस्टल ने अपने आकलन में लिखा है, "अपनी ख़ुद की सेनाओं की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता पर रखने की वजह से सेनाओं ने इस तरीक़े से काम किया है जिसने विदेशी सेनाओं को अफ़ग़ान लोगों से दूर कर दिया है जिसमें मनोवैज्ञानिक दूरी भी शामिल है, जबकि हमें उन्हीं लोगों की सुरक्षा की गारंटी सुनिश्चित करना हमारा लक्ष्य होना चाहिए."

भरोसे का संकट

वर्ष 2001 में अफ़ग़ानिस्तान पर विदेशी सेनाओं के हमले के बाद से वर्ष 2009 में विदेशी सेनाओं के लिए बहुत नुक़सान वाला रहा है क्योंकि इस वर्ष बड़ी संख्या में विदेशी सैनिक मारे गए हैं.

Image caption जनरल ने रणनीति में ही बदलाव करने का आहवान किया है

जनरल स्टैनली मैक्रिस्टल ने बहुत ही बेबाक आकलन में लिखा है कि अफ़ग़ानिस्तान में भ्रष्टाचार भी उतना ही बड़ा ख़तरा है जितना की विद्रोही गतिविधियाँ और उन्होंने दबी ज़ुबान से अफ़ग़ान सरकार की आलोचना भी की है.

जनरल का दावा है कि इन सभी कारकों की वजह से अफ़ग़ान लोगों में भरोसे का संकट पैदा हो गया है. सैनिकों की संख्या बढ़ाने से अफ़ग़ान लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद मिलेगा और एक ऐसा माहौल बनाया जा सकेगा जिसमें एक अच्छी सरकार अपनी जड़ें जमा सके.

वॉशिंगटन पोस्ट ने लिखा है कि जनरल स्टैनली मैक्रिस्टल की यह रिपोर्ट अमरीकी रक्षा मंत्री रॉबर्ट गेट्स को सौंपी गई है.

ज्वाइंट चीफ़ ऑफ़ स्टॉफ़ चेयरमैन एडमिरल माइक मुलेन ने सीनेट की सशस्त्र सेवाओं की कमेटी में कहा था कि तालेबान की विद्रोही गतिविधियों पर क़ाबू पाने की कोशिशों के तहत और ज़्यादा सैनिकों की ज़रूरत पड़ सकती है.

लेकिन राष्ट्रपति बराक ओबामा ने बाद में कहा था कि अफ़ग़ानिस्तान में और सैनिक भेजने के किसी प्रस्ताव पर फिलहाल कोई विचार नहीं किया जा रहा है.

राष्ट्रपति ने कहा था, "हमें रणनीति को दुरुस्त करना होगा और उसके बाद ही संसाधनों के बारे में कोई ठोस फ़ैसला लेना होगा."

बीबीसी के सुरक्षा मामलों के संवाददाता निक चाइल्ड्स का कहना है कि इस रिपोर्ट की भाषा और इसके मीडिया को लीक होने से से बराक ओबामा प्रशासन पर निश्चित रूप से दबाव बढ़ेगा, ख़ासतौर ऐसे माहौल में जब उन्होंने कहा है कि वो इस बारे में कोई अंतिम फ़ैसला लेने की स्थिति में नहीं हैं.

संबंधित समाचार

संबंधित इंटरनेट लिंक

बीबीसी बाहरी इंटरनेट साइट की सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है