'तत्काल क़दम उठाने की ज़रूरत'

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Image caption कार्बन उत्सर्जन पर बातचीत में गतिरोध बना हुआ है

अमरीका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कहा है कि अगर ग्लोबल वॉर्मिंग से नहीं निपटा गया तो आगे वाली पीढ़ियों को इसके बुरे नतीजे भुगतने होंगे.

उन्होंने स्पष्ट किया कि देश बड़े हों या छोटे- सबको जलवायु परिवर्तन के प्रभावों का सामना करना पड़ेगा.

न्यूयॉर्क में जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र के विशेष सम्मेलन को संबोधित करते हुए ओबामा ने कहा कि जलवायु परिवर्तन का ख़तरा कितना बड़ा है, इसे लोग नहीं समझ रहे हैं.

उन्होंने कहा कि पिछले आठ महीने में साफ़ ईंधन और कार्बन उत्सर्जन कम करने के लिए अमरीका ने जितना किया है, उससे पहले उसने कभी नहीं किया.

ओबामा ने कहा कि अमरीका अपनी ज़िम्मेदारी समझता है और इस दिशा में काम करने को वह प्रतिबद्ध है.

इससे पहले सम्मेलन की शुरुआत करते हुए संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने कहा कि जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए तत्काल क़दम उठाने की आवश्यकता है.

इस विशेष सम्मेलन के बाद पिट्सबर्ग में दुनिया की शीर्ष अर्थव्यवस्थाओं वाले देशों का सम्मेलन जी-20 भी शुरू हो होगा.

जलवायु परिवर्तन

जलवायु परिवर्तन पर हो रहा विशेष सम्मेलन कोपेनहेगेन सम्मेलन से दो महीने पहले हो रहा है, जहाँ जलवायु परिवर्तन संधि को मंज़ूरी देने का लक्ष्य रखा गया है.

बातचीत में अहम भूमिका निभाने वाले कार्बन उत्सर्जन को सीमित करने के लिए क्योटो प्रोटोकॉल की जगह अन्य समझौते की कोशिश में हैं.

बीबीसी संवाददाता बारबारा प्लेट के मुताबिक़ जलवायु परिवर्तन पर बातचीत इसलिए रुकी हुई है क्योंकि धनी देश कार्बन उत्सर्जन में कमी करने का वादा नहीं कर रहे, जबकि ग़रीब देश अपने ऊपर लगाई गई सीमा को मानने से इनकार कर रहे हैं.

इन देशों का तर्क है कि अगर वे इस सीमा को स्वीकार कर लेंगे तो उन्हें अपनी अर्थव्यवस्था को विकसित करने में मुश्किल आएगी.

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