राजकुमार जनता की सेवा में

प्रिंस विलियम
Image caption प्रिंस विलियम अनेक समाजसेवी संस्थाओं के साथ सक्रिय रूप से जुड़े हैं

ब्रिटेन के राजकुमार प्रिंस चार्ल्स के दो बेटे प्रिंस विलियम और प्रिंस हैरी अब समाजसेवा यानी चैरिटी में अपना योगदान बढ़ाने जा रहे हैं और कहा जा रहा है कि इसके लिए उन्होंने अपने माता-पिता से प्रेरणा हासिल की.

राजगद्दी पाने की क़तार में दूसरे नंबर पर स्थित प्रिंस विलियम ने कहा है कि उनका इरादा अपना रास्ता ख़ुद बनाने का है और वह राजशाही का सिर्फ़ एक आभूषण बनने के बजाय कुछ ठोस करना चाहेंगे.

पिछले क़रीब तीन वर्ष से दोनों राजकुमार यानी प्रिंस विलियम और प्रिंस हैरी समाज सेवा में ख़ामोशी से और बिना कोई तामझाम किए, सक्रिय हैं. शुरू में तो यह उनका निजी मामला लगा जब उन्होंने समाजसेवा में सक्रिय कुछ कार्यकर्ताओं से मिलना-जुलना शुरू किया था. यह मुलाक़ात एक मेज़ पर थी जिसके एक तरफ़ प्रिंस विलियम और प्रिंस हैरी थे और दूसरी तरफ़ समाजसेवी.

उस मुलाक़ात में हिस्सा लेने वाले एक समाजसेवी का कहना है कि समाजसेवा में अब दोनों राजकुमारों की सक्रियता काफ़ी बढ़ रही है.

इन दोनों राजकुमारों ने समाजसेवा में सक्रिय बीस संस्थाओं के साथ संबंध रखने का फ़ैसला किया है और हाल ही में हुई एक बैठक में शाही मेज़ की लंबाई इतनी बढ़ाई गई कि इन बीस संगठनों के कार्यकर्ता आसानी से बैठ सकें.

प्रिंस हैरी इस बैठक से ग़ायब थे जिस पर प्रिंस विलियम ने मज़ाक करते हुए कहा कि उनकी ख़ुद की उड़ान कुछ अच्छी नहीं है इसलिए उनके बदले प्रिंस हैरी इस कमी को पूरा करते हैं.

पसंद का करियर

ये दोनों राजकुमार सेना का अपना करियर भी जारी रखे हुए हैं और अपनी ख़ुद की शाही पहचान बनाने की कोशिश कर रहे हैं. यह इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि प्रिंस विलियम राजगद्दी के दावेदारों में अपने पिता के बाद दूसरे नंबर पर हैं और अपनी क़िस्मत का इंतज़ार कर रहे हैं.

Image caption प्रिंस विलियम समाजसेवियों का तरह-तरह से हौसला बढ़ाते हैं.

समाजसेवा में अपनी सक्रियता बढ़ाने के पहले क़दम के तौर पर प्रिंसेस चैरिटी फ़ोरम बनाया गया है. वर्ष में दो बार इसकी बैठक होती है जिसमें विभिन्न क्षेत्रों में समाजसेवा कर रही संस्थाएँ हिस्सा लेती हैं. इनमें से हर एक संस्था के संरक्षक या तो प्रिंस विलियम हैं या प्रिंस हैरी.

इस फ़ोरम का उद्देश्य समाजसेवी संस्थाओं को रचनात्मक तरीके से सोचने के लिए प्रेरित करना और एक दूसरे के साथ विचारों का आदान-प्रदान करना है.

राजकुमारों की इस परियोजना के सकारात्मक नतीजे भी सामने आने लगे हैं. गर्मियों में प्रिंस विलियम ने इंग्लैंड की तीसरी सबसे ऊँची पहाड़ी चोटी हेल्वलिन पर चढ़ाई के अभियान में हिस्सा भी लिया.

प्रिंस विलियम किसी भी तरह की परेशानियों का सामना कर रहे लोगों के जीवन में ठोस बदलाव लाना चाहते हैं. उनका कहना था, "एक ऐसा समय और अवसर होता है जब हमारे लिए शाही प्रतीक चिन्ह या आभूषण बनना उपयुक्त होता है, उस दौरान हम लोगों के साथ हाथ मिलाते हैं और लोगों को अपनी इस क्षमता में समर्थन भी देते हैं."

"लेकिन मेरा ख़याल है कि उससे भी अलग बहुत कुछ ऐसा है जो किया जा सकता है और वो करने से सही मायनों में बदलाव आएगा. समाज सेवा एक ऐसा उदाहरण है जिसे मैं हार्दिक रूप से करना चाहता हूँ."

प्रिंस विलियम और प्रिंस हैरी की माँग राजकुमारी डायना की एक मित्र जूलिया सैमुअल का मानना है कि उन राजकुमारों में कुछ गुण अपनी माँ डायना से आए हैं, "राजकुमारी डायना में लोगों के साथ प्रभावी रूप में बातचीत करने का अदभुत गुण था और वो अपनी नज़रों से ही एक रिश्ता क़ायम कर लेती थीं."

प्रिंस विलियम कहते हैं कि वह समाज सेवा के लिए अपने माता-पिता से और अपनी दादी के समर्पित व्यवहार से प्रेरित हुए हैं. हालाँकि वो ये भी कहते हैं कि अभी अपने माता-पिता और दादी की बराबरी तो कर ही नहीं सकते और अभी तो उनके पदचिन्हों पर चलने के लिए क़दम आगे बढ़ाए हैं.

संबंधित इंटरनेट लिंक

बीबीसी बाहरी इंटरनेट साइट की सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है