'सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों को न मानें'

गद्दाफ़ी
Image caption कर्नल गद्दाफ़ी ने कहा कि 'फ़िलहाल संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों को स्वीकार नहीं करना चाहिए'

लीबिया के नेता कर्नल गद्दाफ़ी ने संयुक्त राष्ट्र की महासभा को संबोधित करते हुए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में वीटो के अधिकार और उसके प्रस्तावों पर आपत्ति जताई है और आहवान किया है फ़िलहाल सदस्य देश सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों को न मानें.

उन्होंने सुरक्षा परिषद को संबोधित करते हुए कहा, "संयुक्त राष्ट्र के चार्टर की प्रस्तावना, उसके अनुच्छेद-प्रावधान और अंतरराष्ट्रीय कार्यप्रणाली में अंतर है. प्रस्तावना कहती है - सभी देश बराबर हैं, चाहे वे छोटे हों या बड़े हों. क्या हम स्थायी सदस्यता के मामले में बराबर हैं? नहीं, हम बराबर नहीं हैं. क्या हमारे पास वीटो का अधिकार है? प्रस्तावना कहती है हम बराबर हैं. चार्टर वीटो के ख़िलाफ़ है. हम इसे स्वीकार नहीं करते...हम इसे नहीं मानते.."

उनका कहना था कि सुरक्षा परिषद संयुक्त राष्ट्र महासभा के प्रस्तावों के लिए एक कार्यकारी संस्था है और ये संयुक्त राष्ट्र के सभी देशों की केवल प्रतिनिधि संस्था होनी चाहिए.

कर्नल गद्दाफ़ी का कहना था, "संयुक्त राष्ट्र महासभा दुनिया की संसद है. यहाँ हम सभी का बराबर वोट है, इसीलिए जब हम सुरक्षा परिषद में जाएँ तो वहाँ भी हमारा बराबर का वोट होना चाहिए. हमें सुरक्षा परिषद के किसी प्रस्ताव को फ़िलहाल स्वीकार नहीं करना चाहिए. हमें केवल संयुक्त राष्ट्र महासभा में बहुमत के हिसाब के हुए मतदान के मुताबिक ही चलना चाहिए."

'चीन की स्थायी सदस्यता उचित'

कर्नल गद्दाफ़ी ने ये भी कहा कि केवल चीन की संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्य उचित है क्योंकि अन्य देशों को उनकी स्थायी सदस्यता लोकतांत्रिक तरीके से नहीं मिली है.

उनका कहना था, "लोकतंत्र केवल अमीर के लिए नहीं है या फिर जो ज़्यादा ताकतवर है उसके लिए नहीं है. सभी देशों को बराबरी का अधिकार होना चाहिए. ये उनका राजनीतिक सामंतवाद जिनके पास स्थायी सदस्यता है. इसे सुरक्षा परिषद नहीं, आतंक परिषद कहना चाहिए..."

उनका कहना था कि 'सुरक्षा परिषद ने सुरक्षा प्रदान नहीं की है, केवल आतंक और प्रतिबंध ही दिए हैं.'

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