'देखो, मगर हाथ न लगाना'

Image caption वाइस चांसलर का कहना है कि एक समय था जब ग्रेड के लिए शरीर का सौदा होता था.

खूबसूरत छात्राओं को प्रोफ़ेसरों की नौकरी का 'विशेष भत्ता' बताने वाले वाइस चांसलर की टिप्पणी पर ब्रिटेन में भारी हंगामा खड़ा हो गया है.

बकिंघम यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर डॉक्टर टेरेंस केली ने टाइम्स हायर एजुकेशन मैग़ज़ीन में एक लेख लिखा था जिसमें उन्होंने कहा था कि कई ख़ूबसूरत लड़कियाँ अपना सुंदर शरीर जान-बूझकर दिखाती हैं.

उन्होंने अध्यापकों को सलाह दी कि "देखो, मगर हाथ मत लगाना."

ब्रिटेन के राष्ट्रीय छात्र संगठन इन टिप्पणियों को अपमानजनक और घटिया बताकर इनकी निंदा की है.

बायो केमिस्ट्री के प्रोफ़ेसर डॉक्टर केली ने अपने लेख में कहा था कि ख़ूबसूरत लड़कियों की कल्पना करके पढ़ाने वाले अपने वैवाहिक जीवन में सेक्स को 'मसालेदार' बना सकते हैं.

डॉक्टर केली ने 'शिक्षा जगत के सात घोर पाप' शीर्षक वाले लेख में लिखा है, "ज्यादातर लेक्चरारों को पता होता है कि हर साल क्लास में एक ऐसी लड़की ज़रूर होती है जो अपने शरीर की नुमाइश करती है, जिसे हमेशा अपने निबंध के बारे में सलाह की ज़रूरत होती है, मज़े लेना चाहिए, यह भी एक तरह का भत्ता है."

उन्होंने लिखा है कि एक ज़माना था जब अच्छे ग्रेड पाने के लिए छात्रा शिक्षक को ललचाती थी और उनके बीच शारीरिक संबंधों का पता भी नहीं चलता था.

"अब वो बात नहीं रही, शिक्षा निगरानी से जुड़ी संस्थाओं की मुस्तैदी की वजह से वे दिन अब ख़त्म हो गए हैं जहाँ ग्रेड के लिए शरीर का सौदा होता था."

Image caption डॉक्टर केली बायो केमिस्ट्री के प्रोफ़ेसर हैं

'घटिया सोच'

नेशनल यूनियन ऑफ़ स्टूडेंट्स की महिला मामलों की अधिकारी ओलिविया बेली का कहना है, "मैं समझ नहीं पा रही हूँ कि किसी यूनिवर्सिटी का वाइस चांसलर महिलाओं के प्रति इतना अभद्र कैसे हो सकता है."

डॉक्टर केली का कहना है कि उन्होंने हल्के-फुल्के ढंग से एक गंभीर बात कहने की कोशिश की है, उनका इरादा सिर्फ़ लोगों को हँसाना था न कि किसी को आहत करना.

उन्होंने बीबीसी से बातचीत में सफ़ाई देते हुए कहा, "मैंने यही कहने की कोशिश की है कि यह युवा छात्रा और अधेड़ प्रोफ़ेसर के बीच शारीरिक संबंध अनुचित है. उन्होंने कहा कि यह पत्रिका पढ़े-लिखे लेक्चरर-प्रोफ़ेसर जैसे लोगों के लिए छपती है जिनसे ऐसी बातें समझने की उम्मीद की जा सकती है."

मगर बेली कहती हैं, "चाहे उन्होंने मज़ाक में ये बात कही हो लेकिन फिर भी यह अनुचित है. वे जिस विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर हैं वहाँ पढ़ने वाले लड़कियाँ उनकी इस टिप्पणी से ज़रूर आहत और अपमानित महसूस कर रही होंगी."

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