'बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं को ज़्यादा अधिकार'

ओबामा और उनकी पत्नी, प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और उनकी पत्नी के साथ
Image caption मंदी के दौर में ध्यान चीन, भारत, ब्राज़ील जैसी बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं पर टिकी हैं

अमरीका के पिट्टसबर्ग शहर में जी-20 सम्मेलन से मिल रही ख़बरों के मुताबिक विश्व के नेता विकासशील अर्थव्यवस्थाओं को वैश्विक वित्तीय प्रणाली चलाने में ज़्यादा अधिकार दिए जाने पर सहमत हुए हैं.

इसके बाद चीन जैसे देशों को अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष जैसी संस्थाओं में अधिक वोट दिए जाने की संभावना है.

उधर अमरीकी राष्ट्रपति के कार्यालय ने कहा है कि विकसित और विकासशील देशों का जी-20 सम्मेलन विश्व का मुख्य आर्थिक मंच बन जाएगा. अब ये औद्योगिक देशों के जी-8 सम्मेलन की जगह ले लेगा.

अमरीकी राष्ट्रपति कार्यालय के एक बयान में कहा गया है, "जी-20 देशों के नेता एक ऐतिहासिक समझौते के तहत स्थायी आर्थिक सुधार के लिए जी-20 को अपने प्रयासों के केंद्र में रखने पर राज़ी हुए हैं. उन वित्तीय मुश्किलों से बचने पर भी सहमति बनी है जिनके कारण वित्तीय संकट पैदा हुआ."

इस सम्मेलन के संदेश के एक मसौदे के अनुसार सरकारों को तब तक ख़र्च जारी रखना चाहिए जब तक अर्थव्यवस्थाएँ स्थायी सुधार की ओर नहीं जातीं और शीर्ष बैंक अधिकारियों को दिए जाने वाले बेनस की सीमा भी निर्धारित की जानी चाहिए.

मार्च करने के दौरान झड़पें

इससे पहले गुरुवार को पुलिस ने सम्मेलन स्थल से एक किलोमीटर दूर एकत्र हुए लगभग एक हज़ार प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए आँसू गैस का इस्तेमाल किया है. प्रदर्शनकारियों ने बैनर उठा रखे थे और पूँजीवाद के ख़िलाफ़ नारे लगा रहे थे.

पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें तब शुरु हुईं जब सैकड़ों प्रदर्शनकारियों ने सम्मेलन स्थल की ओर मार्च करने की कोशिश की लेकिन उन्हें इसकी इजाज़त नहीं थी.

व्यापक प्रदर्शनों की संभावना पहले ही व्यक्त की जा चुकी है और प्रशासन ने हज़ारों अतिरिक्त पुलिसकर्मियों को तैनात किया है. इससे पहले अप्रैल में लंदन में जी-20 सम्मेलन के दौरान भी झड़पें हुई थीं.

पिट्टसबर्ग में पहले ही सुरक्षा कारणों से जनजीवन कुछ हद तक प्रभावित हुआ है और कुछ स्कूलों और व्यवसायिक प्रतिष्ठानों को बंद कर दिया गया है.

मंदी के साए में...

जैसे-जैसे विश्व की बड़ी अर्थव्यवस्थाएँ मंदी के दौर से बाहर आ रही हैं वैसे-वैसे आने वाले दिनों में ध्यान इस ओर केंद्रित होगा कि कब और कैसे सरकारों के आर्थिक प्रोत्साहन पैकेज को वापस लिया जाए.

अमरीका पहले ही आहवान कर चुका है कि चीन, ब्राज़ील, भारत जैसी अर्थव्यवस्थाएँ घरेलू उपभोग बढ़ाएँ ताकि अतिरिक्त निर्यात कम किया जा सके.

अमरीकी वित्त मंत्री टिमुथी गैट्नर ने कहा है कि जी-20 देशों के बीच बैंक अधिकारियों के वेतन और बोनस की हद कायम करने के प्रस्तावों बारे में सहमति बनी है.

उनका कहना था कि हर देश अपने मानक ख़ुद तय करेगा लेकिन इनका निरीक्षण जी-20 का वित्तीय स्थिरता बोर्ड करेगा जिसमें केंद्रीय बैंकर और निरीक्षक होंगे.

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