भारत के कर्मचारी परम सुखी

भारतीय कर्मचारी
Image caption भारत का कार उद्योग

आप को शायद यह सुनकर अचम्भा लगेगा कि भारत में नौकरी करने वाले सबसे सुखी होते हैं. लेकिन एक अध्ययन का नतीजा यही कहता है.

"सफलता का राज़ कर्मचारियों की लगन और उत्तम प्रदर्शन में" नाम के एक अध्ययन का इरादा यह पता लगाना था, कि दुनिया में सबसे संतुष्ट कर्मचारी कहाँ हैं.

इसके अंतर्गत व्यापार में कामयाबी के आंकड़ों के आधार पर विश्व के सभी क्षेत्रों के 14 देशों में नौकरी करने वाले लोगों का सर्वेक्षण किया गया तो पता चला कि भारत अव्वल दर्जे पर है.

इस अध्ययन के लिए कर्मचारियों से उनकी कंपनियों के उत्पाद और सेवा की गुणवत्ता के बारे में पूछा गया. साथ ही यह भी कि उन्हें अपनी कंपनी पर कितना गर्व है. कंपनी की उपलब्धियों में उनकी कितनी लगन और भागीदारी है.

पता चला कि कर्मचारियों की तुष्टि के मायने में 76 फीसदी के साथ भारत सबसे ऊपर रहा और 45 फीसदी के साथ जापान सबसे नीचे.

लेकिन भारत के अव्वल होने का राज़ क्या है? 1991 में जब भारत में उदारीकरण लागू हुआ तब से देश के व्यापार से सरकारी संरक्षणवाद का साया हटा और उसे अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रतियोगिता करने का मौक़ा मिला.

इसका नतीजा आर्थिक विकास की गति के रूप में सामने आया. और अब भारत दुनिया में दूसरी सबसे तेज़ बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था का मालिक बन गया है.

लेकिन भारत की इस विकास यात्रा का एक नकारात्मक पहलू भी है. आर्थिक विकास की इस चकाचौंध की रोशनी देश के लाखों लोगों तक नहीं पहुँच पाई है.

आज भी देश में लाखों भूमिहीन, बेरोज़गार, और ऐसे दैनिक मज़दूर हैं, जिन्हें हर रोज़ पचास रुपये से कम में भी काम चलाना पड़ता है.

हाँ, इस्पात, सॉफ्टवेयर, कपड़ा उद्योग और सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में नौकरी करने वाले खुश हैं.

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