लिस्बन संधि को मिलेगा चेक अनुमोदन

यैन फिशर
Image caption यैन फिशर, चैक गणराज्य के प्रधानमंत्री

चेक गणराज्य के प्रधानमंत्री यैन फिशर ने उम्मीद जताई है कि इस साल के अंत तक चेक गणराज्य यूरोपीय संघ की लिस्बन संधि का अनुमोदन कर देगा.

बुधवार को यूरोपीय आयोग के अध्यक्ष होसे मैनुअल बार्रोसो के साथ वीडियो फ़ोन के ज़रिए हुई बातचीत के बाद चेक प्रधानमंत्री फिशर ने कहा, “ लिस्बन संधि के अनुमोदन के लिए स्थितियां अनुकूल हैं. चेक सरकार ने इस साल के अंत तक इस संधि के अनुमोदन के लिए वो सारी ज़मीन तैयार कर ली है.”

यैन फिशर इस बातचीत के लिए ब्रसेल्स जाने वाले थे लेकिन तकनीकी ख़राबी के कारण उनके विमान को उड़ने नहीं दिया गया.

उल्लेखनीय है कि लिस्बन संधि को चेक गणराज्य की संसद की मंज़ूरी मिल चुकी है लेकिन यूरोपीय संघ को संदेहात्मक नज़र से देखने वाले चेक गणराज्य के राष्ट्रपति वात्सलाफ क्लाउज़ ने अभी तक इस संधि पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं.

चेक गणराज्य की संवैधानिक अदालत इसी आशय की एक याचिका पर विचार कर रही है जिसमें चेक गणराज्य के राष्ट्रपति वात्सलाफ क्लाउज के कुछ नज़दीकी सांसदों ने य़ाचिका के ज़रिए अपनी शिकायत दर्ज करवाई थी.

प्रधानमंत्री यैन फिशर ने कहा, “मैं पूरी तरह से आश्वस्त भी हूं कि चेक गणराज्य की संवैधानिक अदालत का फ़ैसला आते ही चेक गणराज्य के राष्ट्रपति अपने हस्ताक्षर के साथ इस संधि के अनुसमोदन के लिए तैयार हो जाएंगे.”

लिस्बन संधि तब तक लागू नहीं हो सकती जब तक सभी 27 यूरोपीय देश उसका अनुसमर्थन नहीं कर देते.

इस संधि पर अभी तक केवल चेक गणराज्य और पोलैंड के हस्ताक्षर नहीं हुए हैं.

यूरोपीय आयोग के अध्यक्ष होसे मैनुअल बार्रोसो ने यैन फिशर की घोषणा का स्वागत करते हुए कहा है कि चैक सरकार की इस प्रतिबद्धता में काफ़ी दम है.

लिस्बन संधि का उद्देश्य यूरोपीय संघ की निर्णय प्रक्रिया को व्यवस्थित करना और दुनिया भर में यूरोपीय संघ की भूमिका को और व्यापक बनाना है.

यूरोपीय देश ये मानते हैं कि सभी 27 सदस्य देशों द्वारा लिस्बन संधि का अनुसमर्थन बुनियादी तौर पर ज़रूरी है, क्योंकि इसके अभाव में यूरोपीय संघ की निर्णय प्रक्रिया की रफ्तार वैसी ही रहेगी जैसी तब थी, जब उसके सदस्य देशों की संख्या केवल 15 थी.

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