मिस्र में नक़ाब पर 'पाबंदी'

नक़ाब
Image caption मिस्र में अधिकतर महिलाएँ हिजाब पहनती हैं लेकिन कुछ नक़ाब भी पहनती हैं

मिस्र के एक जाने-माने मौलवी ने सुन्नी मुसलमानों के सबसे प्रतिष्ठित अल-अज़हर विश्वविद्यालय में महिला छात्राओं और शिक्षकों के नक़ाब पहनने पर पाबंदी लगा दी है.

काहिरा स्थित अल-अज़हर विश्वविद्यालय के इमाम शेख़ मोहम्मद तंतावी ने कहा है कि लड़कियों पर कक्षा में और डॉर्मिटरी में नक़ाब पहनने पर पाबंदी रहेगी.

उन्होंने क़ुरान का हवाला देते हुए कहा है कि नक़ाब इस्लाम में अनिवार्य नहीं है बल्कि यह एक सांस्कृतिक प्रथा है.

इस्तीफ़े की माँग

मिस्र में अधिकतर महिलाएँ हिजाब पहनती हैं लेकिन कुछ नक़ाब भी पहनती हैं. सरकार इस तरह के रुझान को इस्लामी कट्टरपंथ से जोड़कर देखती है और इसका विरोध करती है.

बीबीसी के अरब मामलों के विश्लेषक मगदी अब्देलहादी के अनुसार कुछ दिन पहले शेख़ तंतावी ने ऩकाब पर पाबंदी लगाने का वादा किया था और उन्होंने अपनी बात पूरी की है.

शेख़ तंतावी ने नक़ाब के ख़िलाफ़ अभियान चलाया था और कहा था कि इसका इस्लाम से कोई संबंध नहीं है. अब्देलहादी के अनुसार अभियान के मुकाबले में जो आधिकारिक फ़ैसला लिया गया है वह उतना कड़ा नहीं है.

इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ कुछ हलकों में रोष जताया गया है और कुछ इस्लामी सांसदों ने शेख़ तंतावी के इस्तीफ़े की माँग भी की है.

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