अल-क़ायदा आर्थिक तंगी में

एक वरिष्ठ अमरीकी अधिकारी के अनुसार चरमपंथी संगठन अल-क़ायदा गंभीर आर्थिक तंगी का सामना कर रहा है जबकि तालेबान और दूसरे चरमपंथी संगठन के पास अभी भी आय के कई साधन हैं.

अमरीकी वित्त मंत्रालय में आतंकवादी संगठनों के वित्तीय मामलों पर नज़र रखने वाले अधिकारी डेविड कोहेन के अनुसार अल-क़ायदा इसी साल आर्थिक सहायता के लिए कई बार अपील कर चुका है.

अधिकारी का कहना है कि अलक़ायदा को मिलने वाली आर्थिक सहायता को रोकने के अमरीकी प्रयासों का असर यह हुआ है कि अल-क़ायदा का नेटवर्क बुरी तरह कमज़ोर हुआ है.

उनका कहना है कि अफ़ग़ानिस्तान में नशीली दवाओं के बढ़ते व्यापार की वजह से तालेबान की आर्थिक स्थिति अच्छी हुई है.

डेविड कोहेन के अनुसार अल-क़ायदा के नेतृत्व ने अपने शुभचिंतकों को पहले ही चेतावनी दी है कि आर्थिक तंगी की वजह से नए रंगरूटों की भर्ती और उनको ट्रेनिंग देने का काम प्रभावित हो रहा है.

आपराधिक गतिविधियाँ

वॉशिंगटन में डेविड कोहेन ने कहा, "हमारा अनुमान है कि कई वर्षों बाद अल-क़ायदा की आर्थिक स्थिति सबसे कमज़ोर है और इसका नतीजा यह है कि उसका प्रभाव घट रहा है."

लेकिन उनका कहना है कि आर्थिक सहायता रोकने के प्रयासों के बावजूद तालेबान आर्थिक रुप से लगातार मज़बूत हुए हैं.

अफ़गानिस्तान में अमरीका के विशेष दूत रिचर्ड हॉलब्रुक ने कहा है कि तालेबान को मिलने वाली आर्थिक सहायता का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से निजी सहायता के रुप में आता है.

डेविड कोहेन ने कहा है कि चूंकि तालेबान को कई स्रोतों से मदद मिल रही है इसलिए उसका पता लगाना या उसे रोकना संभव नहीं हो पा रहा है.

उनका कहना है कि चरमपंथी संगठन अब धन जुटाने के लिए आपराधिक गतिविधियों में जुट गए हैं.

उन्होंने आरोप है कि हिज़्बुल्ला म्युज़िक और कंप्यूटर सॉफ़्टवेयर की नकल तैयार करके उसे बेचने और सिगरेट की तस्करी जैसे कामों में लग गया है.

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