करोड़ों लोग रह जाते हैं भूखे

भूखे बच्चे
Image caption एशिया प्रशांत क्षेत्र में सबसे अधिक लोग भूखे रह जाते हैं.

संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि दुनिया भर में एक अरब से अधिक लोग हर दिन भूखे रह जाते हैं और अंतरराष्ट्रीय उपायों के बिना इसे कम करना मुश्किल है.

वैश्विक खाद्य सुरक्षा दिवस के अवसर पर जारी संयुक्त राष्ट्र की सालाना रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनिया भर की जनसंख्या का छठा हिस्सा भूखा सोता है.

रिपोर्ट का कहना है कि हाल के आर्थिक संकट के दौरान भूखे रह जाने वाले लोगों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है और परिस्थितियां पहले से और ख़राब हुई हैं.

संयुक्त राष्ट्र खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) की रिपोर्ट के अनुसार दुनिया का कोई भी देश भुखमरी की समस्या से अछूता नहीं है.

रिपोर्ट कहती है, ‘‘ कोई भी देश इससे अछूता नहीं है. लेकिन जैसा कि आम तौर पर होता है ग़रीब देशों में हालात बेहद ख़राब हैं और लोगों को अधिक परेशानी है.’’

रिपोर्ट के अनुसार एशिया प्रशांत क्षेत्र में भूखे लोगों की संख्या सबसे अधिक है जबकि दूसरे नंबर पर अफ्रीका के सहारा प्रांत के देश आते हैं. वर्ष 2009 में भूखे रहने वालों की संख्या एक अरब को पार कर चुकी है और 1970 के बाद यह संख्या सबसे अधिक है.

एफएओ का कहना है, ‘‘विश्व खाद्य सम्मेलन में दुनिया भर में भूखे रहने वाले लोगों की संख्या 2015 तक घटाने का जो लक्ष्य तय किया गया था वो वर्तमान हालात में पूरा होता नहीं दिख रहा है.’’

रोम में जारी इस रिपोर्ट में कहा गया है कि आर्थिक संकट के कारण ग़रीब देशों को मिल रही विदेशी मदद में भी कमी आई है और निवेश भी घटा है.

अंतरराष्ट्रीय खाद्य नीति शोध इकाई (आईएफपीआरआई) ने जो वर्ल्ड हंगर इंडेक्स जारी किया है उसमें सबसे ख़राब हालत में डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑप कांगो के लोग हैं जहां भूखे लोगों की संख्या में 1990 के बाद सबसे अधिक बढ़ोतरी देखी गई है.

कांगो के बाद बुरुंडी, कोमोरोस और ज़िंबाब्वे का नाम है जबकि मेक्सिको, विएतनाम, ब्राज़ील और सऊदी अरब में परिस्थितियां बेहतर हुई है.

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