भूख से निपटने में भारत असफल

Image caption भारत में लाखों लोगों को भर पेट भोजन नहीं मिलता

अंतरराष्ट्रीय संस्था ऐक्शन एड का कहना है कि भारत में सभी लोगों को पर्याप्त अनाज मुहैया कराने की कोशिशें सफ़ल नहीं हो पाई है जबकि ब्राज़ील और चीन इस दिशा में प्रशंसनीय कार्य कर रहे हैं.

ऐक्शन एड ने विश्व खाद्य दिवस के अवसर पर शुक्रवार को जारी एक रिपोर्ट में इसका ज़िक्र किया है.

रिपोर्ट में अमीर देशों के प्रयासों की भी समीक्षा की गई है. इसके मुताबिक लक्जमबर्ग अपनी जनता को पर्याप्त अनाज मुहैया कराने के लिए सबसे ज़्यादा कोशिश कर रहा है जबकि अमरीका और न्यूज़ीलैंड इस सूची में सबसे निचले पायदान पर हैं.

विश्व खाद्य दिवस के मौक़े पर विभिन्न संस्थाओं के ज़रिए किए गए सर्वे इस बात पर एक मत हैं कि इस समय दुनिया भर में एक अरब से ज़्यादा लोग ऐसे हैं जिन्हें भर पेट भोजन नहीं मिल रहा.

लेकिन ऐक्शन ऐड की रिपोर्ट उससे एक क़दम आगे जाकर उन देशों का नाम लेती है जिन्होंने अच्छा काम किया है या फिर जिसका प्रदर्शन बेहतर नहीं रहा.

विकासशील देशों में ब्राज़ील का प्रदर्शन सबसे बेहतर बताया गया है. रिपोर्ट में ब्राज़ील के भूमि सुधार और ग़रीबों के लिए सामुदायिक रसोई कार्यक्रम के लिए राष्ट्रपति लूला डी सिल्वा की काफी प्रशंसा की गई है.

सामुदायिक रसोई कार्यक्रम

Image caption रिपोर्ट में ब्राज़ील के सामुदियक रसोई कार्यक्रम की पशंसा की गई है.

भूख से पीड़ित लोगों की संख्या कम करने के लिए चीन की भी तारीफ़ की गई है. रिपोर्ट के अनुसार पिछले दस सालों में चीन में पांच करोड़ अस्सी लाख लोगों ने भूख की समस्या से छुटकारा पाया है.

रिपोर्ट में भारत की जमकर आलोचना की गई है. इसके मुताबिक़ नब्बे के दशक के मध्य से अब तक वैसे लोगों की संख्या तीन करोड़ बढ़ गई जिन्हें भर पेट भोजन नहीं मिलता .

अमीर देशों की सूची में उनकी प्रशंसा की गई है जिन्होंने तीसरी दुनिया के देशों की कृषि में निवेश किया है और उन देशों की आलोचना की गई है जिन्होंने जैव इंधन को बढ़ावा दिया है क्योंकि जैव इंधन से खाद्यान्न फसलों की कमी होती है.

सूची बनाने के लिए विभिन्न देशों के ज़रिए किए गए प्रयासों को भी अहमियत दी गयी है केवल अंतिम नतीजों को नहीं और इसी कारण लक्ज़मबर्ग जैसे एक छोटे से देश ने अमीर देशों की फेहरिस्त में प्रथम पायदान पर जगह पाई है.

अमीर देशों की सूची में न्यूज़ीलैंड सबसे निचले पायदान पर है.

न्यूज़ीलैंड पर कृषि के क्षेत्र में सरकारी मदद में भारी कटौती का आरोप लगाया गया है.

अमरीका भी इस सूची में नीचे से दूसरे पायदान पर है. तीसरी दुनिया के किसानों की सहायता के मामले में अमरीका को कंजूस कहा गया है.

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