कटघरे में हमास और इसराइल

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद ने पिछले वर्ष ग़जा पर इसराइली हमले के बारे में जारी उस रिपोर्ट की पुष्टि कर दी है जिसमें इसराइल और फलस्तीनी गुट हमास, दोनों ही पक्षों पर युद्ध अपराधों के आरोप लगाए गए हैं.

रिपोर्ट के लेखक न्यायाधीश रिचर्ड ग्लैडस्टन ने कहा है कि इसराइल और हमास दोनों को ही इन आरोपों की विश्वसनीय जांच करनी होगी और यदि वो ऐसा नहीं करते तो उनके खिलाफ़ अंतरराष्ट्रीय युद्ध अपराध के मुक़द्दमे चलाए जाने चाहिए.

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में मतदान के दौरान 25 देशों ने इस रिपोर्ट के पक्ष में वोट दिया जबकि 6 देशों ने इसका विरोध किया.

इसराइल और अमरीका दोनों ने इसका विरोध किया. उनका तर्क था कि इससे मध्य पूर्व में शांति की आशाओं को आघात लगेगा.

फलस्तीनी प्रशासन ने शुरू में इस मतदान के स्थगन की बात कही थी लेकिन फिर घरेलू आलोचना के कारण उसने अपनी राय बदल ली.

फलस्तीनियों और मानवाधिकार गुटों का कहना है कि जनवरी में ख़त्म होने वाली इस 22 दिन की लड़ाई में ग़ज़ा में 1400 लोग मारे गए थे. इसराइल के अनुसार मरने वालों की संख्या 1166 थी.

इसराइल की ओर से 13 लोग मारे गए थे जिनमे 3 आम नागरिक थे.

"दंडहीनता की संस्कृति"

जिनेवा में हुए इस मतदान में 11 देश अनुपस्थित रहे और जबकि ब्रिटेन और फ्रांस ने वोट नहीं डाला.

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त नवी पिल्लई ने कहा कि अब "दंडहीनता की संस्कृति" को ख़त्म करने का समय आ गया है.

उन्होंने कहा कि इसराइल और फलस्तीनी क्षेत्रों में इस तरह की संस्कृति बनती जा रही है जहाँ कुछ लोग यह मानते हैं कि वो सज़ा से परे हैं.

दूसरी और इसराइली सरकार ने इस रिपोर्ट पर मतदान का विरोध किया था. उसका कहना था कि ग्लैडस्टन रिपोर्ट पक्षपात भरी है क्योंकि यह रिपोर्ट देशों को आतंकवाद के खिलाफ़ अपनी रक्षा का अधिकार नहीं देती.

इसराइल की यह शिकायत भी थी कि यह मतदान सिर्फ ग्लैडस्टन रिपोर्ट पर ही नहीं था बल्कि फलस्तीनी समर्थित उस प्रस्ताव पर भी था जिसमे इसराइल की निंदा की गई थी और हमास के कारनामों को अनदेखा कर दिया गया था.

बहस में भाग लेने वाले अमरीकी प्रतिनिधि का कहना था कि इस प्रस्ताव में इकतरफा रुख़ अपनाया गया था और इससे मध्य पूर्व में शांति की प्रक्रिया और भी कठिन हो जायेगी.

'इकतरफा प्रस्ताव'

बीबीसी के यरूशलेम संवाददाता टिम फ्रैंक का कहना है कि ग्लैडस्टन का अंतरराष्ट्रीय समर्थन बढ़ेगा और इसपर न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र में विचार किया जा सकता है.

दक्षिण अफ्रीका के न्यायाधीश ग्लैडस्टन कि इस 575 पेज लंबी रिपोर्ट के निष्कर्ष में कहा गया है "इसराइल ने जो कारनामे किए हैं उन्हें युद्ध अपराध का नाम दिया जा सकता है और शायद मानवता के खिलाफ़ किए गए अपराधों में भी उनकी गिनती हो सकती है.”

रिपोर्ट में कहा गया है कि ग़ज़ा पर हमले के दौरान इसराइल द्वारा लोगों को जबरन उनके घरों से हटाना, जानबूझ कर आम नागरिकों को निशाना बनाना या फिर उन्हें रक्षा कवच के रूप में इस्तेमाल करना कुछ ऐसे कारनामे है जिन्हें इन अपराधों में शामिल किया जा सकता है.

ग्लैडस्टन रिपोर्ट में ग़ज़ा पर शासन करने वाले हमास गुट को भी युद्ध अपराधों का दोषी पाया गया है, क्योंकि उसके द्वारा दक्षिण इसराइल के भीतर लगातार राकेटों से हमले किए गए थे.

रिपोर्ट में माँग की गई है कि यदि दोनों पक्ष इन युद्ध अपराधों के आरोपों की छह महीनों में जांच नहीं कराते तो ये मामले हेग स्थित अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायलय को सौंप दिए जाने चाहिए.

बीबीसी के संवाददाता के अनुसार मानवाधिकार परिषद के इस प्रस्ताव से फलस्तीनी प्राधिकरण के राष्ट्रपति मुहम्मद अब्बास को थोडी राहत ज़रूर मिलेगी.

जानकारों का कहना है कि यदि इसराइल के युद्ध अपराधों की सुनवाई हेग अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय में करने की सिफारिश करने वाली यह रिपोर्ट संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सामने आती है तो अमरीका इसे निश्चय ही वीटो कर देगा.

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