'हमले में पाकिस्तानी एजेंटों का हाथ'

Image caption राष्ट्रपति अहमदीनेजाद ने हमलावरों की फ़ौरन गिरफ़्तारी की मांग की है.

ईरान के राष्ट्रपति ने कहा है कि ईरान के विशेष सैन्य दस्ते पर हुए आत्मघाती हमले में पाकिस्तानी एजेंटों का हाथ है.

राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद ने पाकिस्तान से मांग की है कि वो जल्द से जल्द इन हमलावरों को गिरफ़्तार करे.

ईरानी अधिकारियों का कहना है कि ये हमलावर पाकिस्तान से आए थे.

सिस्तान-बलूचिस्तान इलाके में हुए इस हमले में कम से कम 35 लोग मारे गए हैं और इनमें विशेष सैन्य दस्ते रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के छह कमांडो भी शामिल हैं.

ईरान का कहना है कि इलाक़े में सक्रिय सुन्नी विद्रोही गुट जुनदल्लाह ने हमलों की ज़िम्मेदारी ली है.

पाकिस्तानी प्रवक्ता ने इस हमले की निंदा की है.

प्रवक्ता अब्दुल बसित ने साथ ही उन दावों को भी खारिज किया है जिनमें कहा गया है कि सुन्नी विद्गोही गुट जुनदल्लाह के सरगना पाकिस्तान में हैं.

ईरानी सरकारी मीडिया का कहना है कि एक या उससे ज़्यादा आत्मघाती हमलावरों ने रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के उस दस्ते को निशाना बनाया जो पाकिस्तानी सीमा के पास स्थित पिशिन ज़िले में कबायली नेताओं के साथ बैठक में शामिल था.

माना जा रहा है कि बैठक शुरू होने से ठीक पहले एक आत्मघाती हमलावर ने बम विस्फोट कर दिया.

राष्ट्रपति अहमदीनेजाद ने कहा है कि उन्हें जानकारी मिली है कि कुछ पाकिस्तानी सुरक्षा एजेंट इस आतंकवादी हमले की मुख्य कड़ियों से जुड़े हुए हैं.

उनका कहना था, ``हम पाकिस्तानी सरकार से मांग करते हैं कि वो बिना देर किए इन लोगों को गिरफ़्तार करें.’’

ईरानी अधिकारियों ने वहां मौजूद एक वरिष्ठ पाकिस्तानी राजनयिक को भी बुलवा भेजा और उनके सामने इन आरोपों को पेश किया.

सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत में मूलत: बलूच लोग रहते हैं जो सुन्नी मुस्लिम हैं और शिया शासन का विरोध करते हैं.

सरकारी संवाद समिति इरना के अनुसार रिवोल्यूशनरी गार्ड्स की ज़मीनी सेना के डिप्टी कमांडर जनरल नूर अली शूस्तारी, गार्ड्स के मुख्य प्रांतीय कमांडर रजब अली मोहम्मदज़ादेह भी इस हमले में मारे गए हैं.

ईरानी संसद के स्पीकर अली लारीजानी ने संसद के अधिवेशन को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘ हम शहीद हुए लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं.’’ उनका यह संबोधन सरकारी रेडियो पर लाइव प्रसारित किया गया.

उनका कहना था, ‘‘आतंकवादियों का मकसद सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत में सुरक्षा स्थिति को अस्त-व्यस्त करना था.’’

सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत की सीमाएं पाकिस्तान और अफ़गानिस्तान से भी लगती हैं और यह पूर्व में भी इस प्रांत में तस्करी, ड्रग्स, डकैती और अपहरण जैसी समस्याएं रही हैं.

ईरान में सुन्नी विद्रोही गुट जुनदल्लाह का कहना है कि वो देश के सुन्नी अल्पसंख्यकों के राजनीतिक और धार्मिक शोषण के ख़िलाफ़ लड़ रही है.

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