तमिल विस्थापित लौटे घरों को

श्रीलंका का माणिक फार्म
Image caption मणिक फ़ार्म शिविर की ख़राब व्यवस्था पर चिंता जताई जाती रही है

श्रीलंका सरकार ने उत्तरी इलाकों के विस्थापितों के पुनर्वास का अभियान शुरू कर दिया है.

आज वावूनिया के माणिक फ़ार्म शिविर से लगभग 6 हज़ार विस्थापितों का जत्था उत्तरी श्रीलंका के मुलईतिवू और किलिनोच्ची के लिए रवाना कर दिया गया है.

इन लोगों में तमिल समुदाय के वे लोग भी शामिल हैं जो युद्ध से पहले तमिल टाइगरों के कब्ज़े वाले इलाकों में रहते थे.

श्रीलंका के उत्तरी इलाक़ों में भेजे जा रहे लगभग 40 हज़ार विस्थापितों में से ये पहला जत्था है, जिसे सेना के शिविरों से रिहा करके उनके घरों में भेजा जा रहा है.

सरकार का कहना है कि इन 40 हज़ार विस्थापितों के पुनर्वास की इस प्रक्रिया में क़रीब एक महीना लग जाएगा.

श्रीलंका के पुनर्वास मंत्री रिशत बदरुद्दीन ने बीबीसी को बताया कि आने वाले हफ़्तों में लगभग 36 हज़ार औऱ शरणार्थियों के पुनर्वास का इंतज़ाम कर दिया जाएगा.

श्रीलंका सरकार ने पहली बार विस्थापितों को उन इलाक़ों में लौटने की अनुमित दी है, जो युद्ध में सेना की जीत से पहले तमिल टाइगरों के क़ब्ज़े में थे.

इससे पहले सरकार 15 हज़ार विस्थापितों को शिविरों से विदा कर चुकी है लेकिन वे लोग तमिल टाइगरों के नियंत्रण में रह चुके इलाक़ों से नहीं थे.

मई में सेना और तमिल टाइगरों में हुए निर्णायक युद्ध के दौरान विस्थापित हुए लगभग ढाई लाख लोग इस समय सेना द्वारा चलाए गए शिविरों में रह रहे हैं.

दबाव

बीबीसी संवाददाता का कहना है कि श्रीलंका सरकार ने भारी अंतरराष्ट्रीय दबाव के तहत विस्थापितों के पुनर्वास की प्रक्रिया शुरू करने की घोषणा की है.

श्रीलंका सरकार ने इससे पहले ये कहा था कि वो इस साल के अंत तक 80 प्रतिशत विस्थापितों को शिविरों से लौटने की अनुमति दे देगी.

सहायता एजेंसियों ने बार बार माणिक फ़ार्म शिविर साफ़ सफ़ाई की बुरी हालत और विस्थापितों की दुर्दशा पर चिंता जताई थी.

विस्थापितों के पुनर्वास की प्रक्रिया पर सरकार के कथित सुस्त रवैये की मानवाधिकार गुटों ने भी आलोचना की.

सरकार ने अपनी सफाई में यही कहती रही थी कि शरणार्थियों को उनके घरों को लौटाने से पहले उसे शिविरों में छुपे तमिल टाइगर समर्थकों की पहचान करनी है, और दूसरे ये भी सुनिश्चित करना है कि इलाक़े में बारूदी सुरंगें नहीं हैं.

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