क़ानूनों का समर्थन करेंगे सांसद

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Image caption चीन और अमरीका के सांसदों ने इस समझौते को अपनी मंजूरी दी है.

डेनमार्क में जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर बैठक कर रहे सोलह देशों के सांसदों ने तय किया है कि वो अपने देशों में मौसम से जुड़े क़ानूनों का समर्थन करेंगे.

अगर ये देश ऐसा करते हैं तो 2020 तक ग्रीनहाउस गैसों की आवश्यक कटौती का सत्तर प्रतिशत हिस्सा पूरा हो जाएगा. इस समझौते का उन सोलह देशों के सासंदों ने समर्थन किया है जहां ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन अधिक होता है.

इस समझौते के बाद दिसंबर में होने वाली संयुक्त राष्ट्र की जलवायु परिवर्तन वार्ताओं के दौरान विश्व भर के नेता इस मुद्दे पर कोई बड़ा फ़ैसला कर सकेंगे.

इस बैठक में दुनिया को ये दिखाने की कोशिश की गई थी कि ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन करने वाले देशों के सांसद मिल कर कितनी प्रगति कर सकते हैं. इस समझौते के तहत ये सांसद अपने देशों में ऊर्जा के मानकों, जंगलों के संरक्षण और अक्षय ऊर्जा के संसाधनों से जुड़े क़ानूनों का समर्थन करेंगे.

अगर ये देश ऐसा करते हैं तो 2020 तक ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में कमी का सत्तर प्रतिशत हिस्सा पूरा हो जाएगा जिससे दुनिया का तापमान नहीं बढ़ेगा.

वैज्ञानिकों का मानना है कि अगर 2020 तक ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में अपेक्षित कमी नहीं आई तो तापमान दो डिग्री सेल्सियस तक बढ़ सकता है.

ये सांसद इस बात पर भी राज़ी हुए हैं कि वो जलवायु परिवर्तन से जुड़े तात्कालिक और दूरगामी लक्ष्यों को प्राप्त करने वाले क़ानूनों का समर्थन करेंगे और सरकारों को बाध्य करेंगे कि वो इस दिशा में की जा रही प्रगति की रिपोर्ट लगातार देते रहें.

समझौते के ये सिद्धांत अमरीकी सांसद एड मार्के और चीन की नेशनल पीपुल्स कांग्रेस के चेयरमैन वांग गुआंगताओ ने पेश किए थे.

मार्के का कहना था कि सांसदों के बीच हुआ यह समझौता इस बात का संकेत है कि दिसंबर में होने वाला संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन से जुड़ा सम्मेलन सफल रहेगा.

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