'चीन के साथ सीमा विवाद जटिल'

मनमॉहन सिंह
Image caption भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह आसियान के मंच से बोलते हुए

भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने चीन के साथ उठे सीमा विवाद को जटिल मुद्दा बताया है.

मनमोहन सिंह ने दलाई लामा की अगले महीने प्रस्तावित अरुणाचल प्रदेश यात्रा पर कोई टिप्पणी नहीं की, लेकिन उन्होंने पत्रकारों से कहा कि वेन जियाबाओ से उन्होंने ये कहा है कि दलाई लामा को भारत अपने सम्माननीय अतिथि और धार्मिक नेता के रूप में देखता है.

मनमोहन सिंह का कहना था कि चीन के साथ उठे सीमा विवाद को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता. उनका कहना था कि इस मुद्दे पर दोनों देशों के विदेशमंत्री मंगलवार को बंगलौर में विस्तार से बातचीत करेंगे.

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का कहना था कि जब तक इस मुद्दे का हल नहीं हो जाता, तब तक दोनों पक्षों की ये ज़िम्मेदारी बनती है कि वे शांति और सद्भाव को बनाए रखें.

दक्षिण पूर्व एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (आसियान) के थाईलैंड में आयोजित सम्मेलन के दौरान चीनी प्रधानमंत्री वेन जियाबाओ के साथ शनिवार को भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की एक बैठक हुई थी.

उल्लेखनीय है कि भारत और चीन के बीच अरुणाचल प्रदेश और अन्य मसलों पर हाल ही में हुए वाकयुद्ध के बाद दोनों नेताओं की ये पहली बैठक थी जिसमें कई द्विपक्षीय मुद्दों पर बात हुई है.

थाईलैंड की अपनी दो दिवसीय यात्रा के समापन के मौक़े पर पत्रकारों से बातचीत में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि चीन के प्रधाममंत्री वेन जियाबाओ के साथ उनकी बातचीत में कई द्विपक्षीय मुद्दों पर खुली और रचनात्मक बातचीत हुई. उन्होंने बताया कि दोनों देश विवादित मुद्दों को सौहार्द्रपूर्ण तरीके से निपटाने पर राज़ी हुए हैं. मनमोहन सिंह का कहना था, “ सीमा विवाद का निपटारा होने तक दोनों देशों को शांति औऱ सद्बाव बनाए रखने की ज़रूरत है.”

चीनी प्रधानमंत्री के साथ लगभग 4 घंटे चली इस बैठक में दोनों नेताओं ने भारत के उत्तरपूर्वी राज्य अरुणाचल प्रदेश को लेकर उठे सीमा विवाद और दलाई लामा की अगले महीने प्रस्तावित अरुणाचल प्रदेश यात्रा जैसे विवादित मुद्दों को चर्चा में नहीं आने दिया.

मनमोहन सिंह ने दलाई लामा की अगले महीने प्रस्तावित अरुणाचल प्रदेश यात्रा पर कोई टिप्पणी नहीं की, लेकिन उन्होंने पत्रकारों से कहा कि वेन जियाबाओ से उन्होंने ये कहा है कि दलाई लामा को भारत अपने सम्माननीय अतिथि और धार्मिक नेता के रूप में देखता है.

इससे पहले जब अरुणाचल प्रदेश पर दोनों देशों में वाकयुद्ध छिड़ा था तब भारत ने कड़ा रुख़ अपनाते हुए कहा था कि ‘अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न अंग है.’ साथ ही भारत ने ये भी कहा था कि ‘भारत, पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में चीनी गतिविधियों के बारे में चिंतित है.’

भारत की विदेश सचिव निरुपमा राव ने भी तब यही कहा था कि दोनों नेता इस बैठक में द्विपक्षीय मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करेंगे.

संबंधित समाचार