'कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं'

हिलरी क्लिंटन
Image caption अमरीका की विदेश मंत्री हिलरी क्लिंटन तीन दिन की यात्रा पर पाकिस्तान पहुंची हैं.

अमरीका की विदेश मंत्री हिलरी क्लिंटन तीन दिन की पाकिस्तान यात्रा पर इस्लामाबाद पहुंच गई हैं. इस यात्रा को अमरीका और पाकिस्तान के रिश्तों के अध्याय का एक नया पृष्ठ बताया जा रहा है.

ये माना जाता है कि अपनी यात्रा के दौरान वो कई नागरिक निवेश समझौतों पर हस्ताक्षर करेंगी.

लेकिन उनके पहुंचने के कुछ ही घंटे बाद पेशावर में एक ज़बरदस्त कार बम हमला हुआ जिसमें कम से कम 85 लोग मारे गए.

अमरीका को पाकिस्तान के प्रशासनिक ढांचे पर बढ़ते चरमपंथी हमलों और उसके परमाणु अस्त्र भंडार की सुरक्षा को लेकर चिंता है.

पाकिस्तान अमरीका का प्रमुख सहयोगी देश है और अमरीकी हितों के संरक्षण में उसकी सहायता बहुत महत्वपूर्ण है.

उधर अमरीका के राष्ट्रपति ओबामा का प्रशासन पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान में सक्रिय अल क़ायदा और तालेबान को हराने की रणनीति पर बहस में लगा हुआ है.

रिश्ते मज़बूत करने की ज़रूरत

इस्लामाबाद पहुंचने के बाद श्रीमती क्लिंटन ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा, “हम पाकिस्तान के साथ अपने रिश्ते और मज़बूत बनाना चाहते हैं”.

उन्होने कहा कि अमरीका पाकिस्तान के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा है और उन नृशंस अतिवादी संगठनों की भर्त्सना करता है जो निरपराध नागरिकों की हत्या कर रहे हैं और जिन्होने पूरे समाज को आतंकित कर रखा है.

पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी के साथ एक संयुक्त समाचार सम्मेलन में हिलरी क्लिंटन ने कहा, “हम आपको वो सब मदद देंगे जो आपको चाहिए”.

उन्होने कहा, “अमरीका न केवल पाकिस्तान की सरकार के साथ बल्कि पाकिस्तान के लोगों के साथ एक नई साझेदारी का पन्ना खोलना चाहता है”.

हिलरी क्लिंटन ने कहा कि अमरीका पाकिस्तान के साथ आपसी सम्मान और साझा उत्तरदायित्व पर आधारित गहरे रिश्ते बनाना चाहता है.

पिछले सप्ताह अमरीकी संसद के ऊपरी सदन ने प्रतिरक्षा ख़र्च का एक विधेयक पारित किया था जिसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पाकिस्तान को दी जाने वाली सैन्य सहायता केवल आतंकवाद के ख़िलाफ़ चल रही लड़ाई में इस्तेमाल हो.

उसमें नई और कड़ी शर्ते लगाई गई हैं जिसमें कहा गया है कि अमरीका से मिली कोई भी सैन्य मदद भारत के ख़िलाफ़ इस्तेमाल नहीं की जा सकती.

विधेयक में यह शर्त भी है कि पाकिस्तान को जो भी अमरीकी सैन्य सामान भेजा जाए उसकी खोज ख़बर रखी जाए कि वह कहां पहुंचा.

संवाददाताओं का कहना है कि इस विधेयक के कारण पाकिस्तान और अमरीका के बीच तनाव बढ़ सकता है क्योंकि इसे पाकिस्तान अपने घरेलू मामलों में हस्तक्षेप के रूप में देख सकता है.

इस महीने के शुरु में राष्ट्रपति ओबामा ने पाकिस्तान को साढ़े सात अरब डॉलर की सहायता वाले एक विधेयक पर हस्ताक्षर किए थे जिससे पाकिस्तान की असैनिक सहायता राशि तिगुनी हो गई है.

लेकिन यह सहायता राशि सीधे पाकिस्तान के हवाले नहीं की जाएगी बल्कि उसे इस्लामाबाद स्थित अमरीकी दूतावास के माध्यम से विभिन्न विकास योजनाओं में ख़र्च किया जाएगा.

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