यूरोपीय संघ जलवायु धनराशि पर सहमत

कार्बन उत्सर्जन
Image caption जलवायु परिवर्तन की चुनौतियाँ विश्वव्यापी हैं

यूरोपीय संघ के नेताओं में जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों का सामना करने में अन्य देशों को वित्तीय मदद देने के मुद्दे पर सहमति हुई है हालाँकि इस मद में दी जाने वाली राशि की अभी कोई सीमा तय नहीं की गई है.

यूरोपीय संघ के नेताओं में मुख्यालय ब्रसेल्स में हुई एक बैठक में यह सहमति बनी है और ख़ासतौर से दिसंबर में प्रस्तावित कोपनहेगन जलवायु सम्मेलन से पहले यह सहमति होना ख़ासा महत्वपूर्ण है.

यूरोपीय संघ में सहमति बनी कि जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न चुनौतियों का सामना करने के लिए 100 अरब यूरो यानी लगभग 90 अरब पाउंड राशि प्रतिवर्ष की ज़रूरत होगी और यह ज़रूरत वर्ष 2020 तक हर साल होगी. यूरोपीय संघ भी इस राशि में अपना उपयुक्त योगदान करेगा, बशर्ते कि अन्य देश भी इस दिशा में एक सही क़दम उठाएँ.

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री गॉर्डन ब्राउन ने कहा है कि यूरोपीय संघ ने इस क्षेत्र में साहसिक प्रस्तावों के ज़रिए पहल की है. हालाँकि इस बातचीत ख़ासतौर से इस मुद्दे पर मतभेद रहे कि यूरोपीय संघ के सदस्य देश अन्य देशों को कितनी राशि और किस तरह देंगे.

पूर्वी यूरोप के नौ ग़रीब सदस्य देशों ने धमकी दी की कि वो इस बारे में कोई भी समझौता नहीं होने देंगे जब तक कि यूरोपीय संघ के धनी देश ज़्यादा योगदान ना करें.

यूरोपीय संघ के सदस्य देशों के लिए ख़र्चों में कटौती या वित्तीय योगदान के कोई लक्ष्य निर्धारित नहीं किए गए हैं लेकिन कोई भी राशि स्वैच्छिक आधार पर दी जाएगी.

अन्य देशों को दी जाने वाली इस राशि में यूरोपीय संघ के किस सदस्य देश को कितना हिस्सा वहन करना होगा, इस पर एक कार्यदल बाद में कोई रास्ता निकालेगा.

पर्यावरणवादी संगठनों ने यूरोपीय संघ की इस सहमति की यह कहते हुए आलोचना की है कि यह काफ़ी नहीं है.

लिस्बन संधि

यूरोपीय संघ के नेताओं में लिस्बन संधि को मंज़ूरी सुनिश्चित कराने के लिए क़दम उठाने पर भी सहमति हुई है. लिस्बन संधि में यूरोपीय संघ में निर्णय लेने की प्रक्रिया को ज़्यादा सुचारू बनाने और विश्व स्तर पर इस संघ की भूमिका और ज़्यादा असरदार बनाने के लिए कुछ प्रावधान किए गए हैं.

Image caption ब्राउन ने कहा कि अमीर यूरोपीय देशों को ज़्यादा भार उठाना पड़ेगा

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री गॉर्डन ब्राउन इस सहमति के बारे में ज़्यादा जानकारी देते हुए कहा कि इस बैठक में जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर हुई बातचीत काफ़ी सफल रही है.

गॉर्डन ब्राउन ने कहा, "यूरोपीय संघ साहसिक प्रस्तावों के साथ बढ़त ले रहा है, हम आने वाले वर्षों को बिना ठोस कार्रवाई किए, यूँ ही नहीं गुज़रने दे सकते."

यूरोपीय संघ का कहना है कि जलवायु परिवर्तन की चुनौतियाँ का सामना करने के लिए वर्ष 2020 तक प्रतिवर्ष लगभग 100 अरब यूरो की राशि की ज़रूरत पड़ेगी और इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए हर देश को 22 अरब से लेकर 50 अरब यूरो प्रतिवर्ष का योगदान करना पड़ेगा.

गॉर्डन ब्राउन ने कार्बन उत्सर्जन कम करने के लिए एक त्वरित योजना की भी घोषणा की जिसके तहत धनी देश ग़रीब देशों के लिए विकास धनराशि देंगे. यह योजना कोपनहेगन सम्मेलन के तुरंत बाद लागू हो जाएगी और धनी देशों से तुरंत ही पाँच से सात अरब यूरोप की राशि आएगी.

यूरोपीय संघ के अध्यक्ष होज़े मैनुअल बरोज़ो ने कहा है कि सदस्य देशों के नेताओं के बीच यह सहमति बनना बहुत महत्वपूर्ण घटनाक्रम है जिससे जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों का सामना करने में तेज़ी आएगी.

इस बैठक में चैक गणराज्य को मूलाधिकारों के चार्टर से मुक्ति दे दी गई है जिसका मतलब है कि चैक गणराज्य अब लिस्बन संधि पर हस्ताक्षर कर सकेगा. ब्रिटेन और पोलैंड को इस चार्टर से पहले ही मुक्ति मिली हुई है.

चैक गणराज्य के राष्ट्रपति वैक्लाव क्लाउस ने कहा भी है कि अब वे लिस्बन संधि पर हस्ताक्षर करने के लिए कोई अन्य शर्त नहीं रखेंगे. सिर्फ़ चैक गणराज्य ही 27 में से एकमात्र ऐसा सदस्य देश है जिसने अभी लिस्बन संधि को मंज़ूरी नहीं दी थी.

अगर चैक गणराज्य लिस्बन संधि को मंज़ूरी दे देता है तो संवाददाताओं का कहना है कि यह अगले महीने यानी नवंबर 2009 से ही प्रभाव में आ सकती है.

फ्रांस के राष्ट्रपति निकोला सारकोज़ी ने भी कहा कि लिस्बन संधि निःसंदेह एक दिसंबर से तो लागू हो ही जाएगी.

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