एचआईवी ग्रसित लोग जा पाएँगे अमरीका

अमरीका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कहा है कि एचआईवी ग्रसित लोगों के अमरीका में आने पर लगी 22 साल पुरानी पाबंदी हटाई जाएगी.

उन्होंने कहा कि अगर अमरीका एचआईवी और एड्स के क्षेत्र में अगुआई करना चाहता है तो इस तरह का क़दम उठाना ज़रूरी है.

अमरीका उन चंद देशों में शामिल है जहाँ एचआईवी ग्रसित होने पर देश में आने की मनाही है. माना जा रहा है कि प्रतिबंध 2010 के शुरु में हटा लिया जाएगा.

बराक ओबामा ने कहा कि ये पाबंदी तथ्यों के बिनाह पर नहीं बल्कि भय के कारण लगाई गई थी.

राष्ट्रपति ने रायन व्हाइट एक्ट के तहत एड्स से पीड़ित लोगों के लिए अतिरिक्त धनराशि देने की भी घोषणा की. ये एक्ट एक 13 वर्षीय अमरीकी लड़के के नाम पर रखा गया था जिसे खून चढ़ाने के दौरान एड्स हो गया था और इसके बाद अमरीकियों में इस बीमारी के प्रति जागरुकता बढ़ी थी.

इस लड़के की 18 साल की उम्र में 1990 में मौत हो गई थी. इस एक्ट के तहत करीब पांच लाख ऐसे लोगों की मदद की जाती है जिनकी आमदनी कम है.

'एड्स बड़ी समस्या'

बराक ओबामा ने कहा, "एड्स को फैलने से रोकने के लिए हम विश्व का नेतृत्व कर रहे हैं. इसके बावजूद अमरीका में एचआईवी वाले लोग प्रवेश ही नहीं कर सकते. सोमवार को प्रशासन नए नियम का आदेश दी देगी जिसके बाद नए साल से पाबंदी हट जाएगी."

राष्ट्रपति ने कहा, "लोग एचआईवी का परीक्षण नहीं करवाते क्योंकि इससे सामाजिक प्रतिष्ठा को जोड़कर देखा जाता है, इसे दूर करने के लिए भी क़दम उठाने होंगे. लोग अपनी ही बीमारी का सामना नहीं कर रहे हैं जिससे बीमारी के फैलने की गति तेज़ हुई है."

एचआईवी ग्रसित लोगों के आने पर पाबंदी हटाने की प्रक्रिया जॉर्ज डब्ल्यू बुश के कार्यकाल के दौरान शुरु हुई थी.

अमरीका में कुछ श्रेणियों के तहत लोगों के देश में प्रवेश करने पर पाबंदी है और 1987 में एचआईवी ग्रसित लोगों को भी इसमें शामिल किया गया था.

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