जलवायु परिवर्तन पर धार्मिक मुहिम

दुनिया भर से इकट्ठा होने वाले धार्मिक नेता कुछ ऐसे संकल्प लेने की तैयारियाँ कर रहे हैं कि हर धर्म और परंपरा के अनुसार जलवायु परिवर्तन की चुनौती का सामना किस तरह से किया जा सकता है.

विश्व भर में मौजूद प्रमुख धर्मों और परंपराओं के लगभग 200 धार्मिक नेता अगले तीन दिन तक ब्रिटेन के प्रसिद्ध विंडसर कासल नामक दुर्ग में सम्मेलन करेंगे. विंडसर कासल ब्रिटेन की राजशाही का आधिकारिक निवास रहा है.

इस सम्मेलन से पहले ही कुछ संकल्प सार्वजनिक किए जा चुके हैं जिनमें एक ये भी है कि पवित्र धार्मिक ग्रंथों और पुस्तकों का प्रकाशन ऐसे काग़ज़ पर किया जाएगा जो पर्यावरण की दृष्टि से उपयुक्त होगा. इसके अलावा प्रार्थना स्थलों में टिकाऊ या फिर से इस्तेमाल होने वाले स्रोतों से हासिल होने वाली ऊर्जा का इस्तेमाल शुरू किया जाएगा.

सम्मेलन के आयोजकों को संयुक्त राष्ट्र का समर्थन हासिल है. आयोजकों का कहना है कि यह सम्मेलन जलवायु परिवर्तन की चुनौती पर इतिहास के सबसे बड़े सामाजिक आंदोलन का प्रतिनिधित्व करता है.

तीन दिन के इस सम्मेलन में ऐसे धार्मिक नेता जलवायु परिवर्तदन की चुनौता की सामना करने का संकल्प लेंगे जो दुनिया भर के अरबों लोगों का प्रतिनिधित्व करते हैं.

सम्मेलन आयोजकों ने उम्मीद जताई है कि इस सम्मेलन से विश्व के राजनीतिक नेताओं को एक स्पष्ट संदेश जाएगा जो कोपनहेगन में दिसंबर में जलवायु परिवर्तन पर सम्मेलन करने जा रहे हैं.

अलायंस ऑफ़ रिलीजियस एंड कंज़रवेशन के महासचिव मार्टिन पामर का कहना था, "कोपनहेगन में हर नेता को एक ही बात के लिए राज़ी होना होगा लेकिन विंडसर कासल में हो रहे इस सम्मेलन की अनोखी बात ये है कि तमाम आस्थाओं और धर्मों के लोग इस बात पर राज़ी होंगे कि हम नहीं जानते कि राजनेताओं की क्या योजनाएँ हैं मगर हम अपना काम हर क़ीमत पर करने जा रहे हैं."

आयोजकों का कहना था कि चीन में हर एक दाओवादी मंदिर में सौर ऊर्जा का प्रयोग किया जाएगा, यहूदी लोग आशा करते हैं कि वो अपने समुदाय की माँस खाने की ज़रूरतों को आधा कर देंगे और इसराइल को हरित ऊर्जा इस्तेमाल करने में बढ़त लेने वाला देश बनाया जाएगा.

"तंज़ानिया में ईसाई लोग 80 लाख नए पेड़ लगाएंगे. आस्थाओं वाले नेता भी अपने अनुयाइयों को पर्यावरण संबंधी मुद्दों के बारे में और ज़्यादा जागरूक बनाएंगे और इस तरह से निवेश किया जाएगा जिससे पृथ्वी को कोई हानि ना पहुँचे."

ऐसे हालात में जबकि कोपनहेगन सम्मेलन पर वार्ताओं की शुरूआत होने में कुछ ही सप्ताह बचे हैं, हर तरफ़ ये चिंताएँ नज़र आ रही हैं कि विश्व की सरकारों के नेता क्या-क्या संकल्प लेने के लिए तैयार होंगे.

धार्मिक नेताओं के इस सम्मेलन का उद्देश्य यह दिखाना है कि दुनिया भर में धार्मिक नेता जलवायु परिवर्तन की चुनौती का सामना करने के लिए ऐसे महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित करने के लिए तैयार हैं, भले ही उनके राजनीतिक नेता इस चुनौती का सामना करने के लिए कुछ भी फ़ैसले लेते हैं.

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