'जलवायु परिवर्तन पर प्रयास तेज़ करें'

ग्रीनपीस कार्यकर्ता
Image caption जलवायु परिवर्तन को लेकर ठोस कदम उठाने की माँग ज़ोर पकड़ रही है

अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कहा है कि अमरीका और यूरोपीय संघ को कोपेनहेगन में होनेवाले जलवायु परिवर्तन पर सम्मेलन को लेकर अपने प्रयास तेज़ कर देने चाहिए.

अमरीका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने इस विषय पर वरिष्ठ यूरोपीय संघ के अधिकारियों के साथ बैठक की है.

ओबामा का कहना था,'' हमने जलवायु परिवर्तन पर गहन बातचीत की और हम इस बात पर सहमत हुए है कि अभी से कोपेनहेगन में होने वाली बैठक को लेकर अपने प्रयासों को दोगुना कर दें ताकि बैठक का प्रारूप तैयार किया जा सके.''

दूसरी ओर संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून का कहना है कि उन्हें नहीं लगता है कि कोपनहेगन में होनेवाले जलवायु परिवर्तन सम्मेलन में दुनियाभर के नेता किसी समझौते पर सहमत हो पाएंगे.

बान की मून का कहना था कि विभिन्न देश ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन की सीमा पर कोई वादा करने को तैयार नहीं लगते हैं. वे सैद्धांतिक रूप से भले ही सहमत हो सकते हैं.

ग़ौरतलब है कि अगले महीने डेनमार्क के कोपनहेगन में जलवायु परिवर्तन सम्मेलन होना है.

यूरोपीय आयोग के अध्यक्ष होज़े मैनुएल बरोसो ने भी इस सम्मलेन की सफलता पर संदेह व्यक्त किया है.

उनका कहना है कि वो सम्मेलन की शुरुआत से पहले चल रही बातचीत को लेकर चिंतित हैं.

अफ़्रीका का बहिष्कार

इधर अफ़्रीकी देशों ने बारसेलोना में जलवायु परिवर्तन संबंधी बातचीत का बहिष्कार कर दिया है.

उनका कहना है कि विकसित देशों ने कार्बन उत्सर्जन का लक्ष्य बहुत कम रखा है.

दूसरी ओर जर्मनी की चांसलर एंगेला मर्केल ने अमरीका से अनुरोध किया है कि वो जलवायु परिवर्तन की मुहिम में यूरोप का साथ दे.

उन्होंने अमरीकी कांग्रेस को अपने संबोधन में कहा कि यदि यूरोप और अमरीका उदाहरण पेश करेंगे तो चीन और भारत जैसे देशों की कोपनहेगन सम्मेलन के प्रस्तावों को स्वीकार करने की संभावना अधिक होगी.

उल्लेखनीय है कि अगले महीने लगभग 200 देशों के नेता कोपनहेगन में मिलेंगे ताकि जलवायु परिवर्तन को लेकर एक विश्वव्यापी नीति तैयार की जा सके.

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