अब्बास चुनाव में इच्छुक नहीं

महमूद अब्बास
Image caption महमूद अब्बास शांति वार्ता में ठोस प्रगति ना होने से नाख़ुश हैं

फ़लस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास ने जनवरी में इस पद के लिए होने वाले चुनाव में फिर से खड़े होने में अनिच्छा व्यक्त की है.

फ़लस्तीनी मुक्ति संगठन यानी पीएलओ के पदाधिकारियों ने पश्चिमी तट में पत्रकारों को बताया है कि महमूद अब्बास ने ज़ोर देकर कहा है कि 24 जनवरी 2010 को होने वाले इस चुनाव में वो फिर से खड़ा नहीं होना चाहते हैं.

महमूद अब्बास के एक सहयोगी नेता ने पहले कहा था कि इसराइल के साथ शांति वार्ता में कोई ठोस प्रगति नहीं होने और हमास के साथ कोई सुलह-सफ़ाई नहीं होने की वजह से महमूद अब्बास के फिर से चुनाव लड़ने के क़दम पर असर पड़ सकता है.

लेकिन एक अन्य नेता ने कहा कि पीएलओ के पदाधिकारी महमूद अब्बास का मन बदलने की कोशिश कर रहे हैं.

महमूद अब्बास के एक वरिष्ठ सलाहकार यासिर आबिद रब्बो ने समाचार एजेंसी एएफ़पी से कहा कि पीएलओ की कार्यकारी समिति ने फ़िलहाल महमूद अब्बास के इस फ़ैसले को तो ख़ारिज कर दिया है और पीएलओ चुनाव में महमूद अब्बास की उम्मीदवारी का समर्थन करेगा.

महमूद अब्बास ने वर्ष 2004 में तत्कालीन फ़लस्तीनी नेता यासिर अराफ़ात की मृत्यु के बाद पीएलओ का नेतृत्व संभाला और उसके एक वर्ष बाद वो फ़लस्तीनी राष्ट्रपति बने थे.

Image caption फ़लस्तीनी शांति प्रक्रिया में कुछ ख़ास प्रगति नहीं हुई है

लेकिन इसराइल के साथ शांति वार्ता में कोई ठोस प्रगति दर्ज कराने के लिए महमूद अब्बास को ख़ासा संघर्ष करना पड़ा है लेकिन कुछ कामयाबी हाथ नहीं लगी है और पश्चिमी तट में यहूदी बस्तियाँ बढ़ाने के मुद्दे पर अब भी गतिरोध बना हुआ है.

फ़तह और हमास

महमूद अब्बास को हमास आंदोलन से भी ख़ासी प्रतिद्वंद्विता का सामना करना पड़ा है. हमास ने ग़ज़ा क्षेत्र में जनवरी 2006 में विधायिका चुनावों में जीत हासिल करने के बाद अपनी सरकार बनाई थी और दोनों संगठनों यानी फ़तह और हमास के बीच मतभेद रहे हैं.

मिस्र ने हमास और फ़तह संगठनों के बीच सुलह-सफ़ाई कराने की हाल के समय में काफ़ी कोशिशें की हैं मगर कोई नतीजा नहीं निकला. महमूद अब्बास ने कहा है कि फ़तह और हमास के बीच चाहे कोई समझौता हो या ना हो, वे फिर भी चुनाव कराने की घोषणा करेंगे.

फ़लस्तीनी विधायिका परिषद या संसद का कार्यकाल जनवरी 2010 में समाप्त हो रहा है और संविधान के अनुसार उससे पहले नए चुनाव कराए जाने ज़रूरी है. महमूद अब्बास का कार्यकाल भी अगले वर्ष समाप्त हो रहा है.

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