बैंकों को और ज़िम्मेदार होने की ज़रूरतःब्राउन

ब्रितानी प्रधानमंत्री गार्डन ब्राउन

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री गार्डन ब्राउन ने कहा है कि बैंकों को और अधिक ज़िम्मेदार होने की ज़रूरत है. ऐसा कतई स्वीकार्य नहीं होगा कि बैंकिंग की सफलता की मलाई कुछ लोगों तक ही सीमित रहे लेकिन विफलता की मार सब पर पड़े.

स्कॉटलैंड में जी-20 की बैठक को संबोधित करते हुए उन्होंने बैंकों में वित्तीय लेन-देन पर टैक्स लगाने का प्रस्ताव रखा और कहा कि ऐसा करने से बैंकिंग क्षेत्र में दूसरे संकट से बचने में मदद मिलेगी.

हालांकि गार्डन ब्राउन ने स्पष्ट कहा कि अकेले ब्रिटेन ऐसा करने नहीं जा रहा है और बैंकिंग के क्षेत्र में ऐसे किसी नए टैक्स के लिए वैश्विक स्तर पर सहमति बनानी होगी.

उन्होंने कहा कि दुनियाभर के बैंको को एक 'सामाजिक अनुबंध' के साथ आगे बढ़ना होगा ताकि बैंकिंग क्षेत्र समाज के प्रति अधिक ज़िम्मेदार बन सके.

दुनियाभर के 20 विकसित और विकासशील देशों के वित्त मंत्रियों की जी-20 बैठक शनिवार को स्कॉटलैंड में शुरू हो गई है.

स्कॉटलैंड़ में बैठक की शुरुआत में बोलते हुए ब्रितानी वित्त मंत्री एलिस्टेयर डार्लिंग ने कहा कि जिस तत्परता के साथ जी-20 देशों ने वैश्विक आर्थिक संकट से निपटने के प्रयास किए, वैसी ही तत्परता जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए भी चाहिए.

उन्होंने कहा कि अगले महीने कोपनहेगन में होने वाले संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन से पहले इस दिशा में कुछ प्रगति होना अनिवार्य है.

हालांकि इस बैठक के पहले जलवायु परिवर्तन और अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए दी जाने वाली आर्थिक सहायता के मुद्दे पर मतभेद सामने आए हैं.

इस बैठक के दो प्रमुख मुद्दे भी यहीं हैं. एक तो यह कि किस तरह से कार्बन गैसों के उत्सर्जन को कम किया जाए और दूसरा यह कि वैश्विक आर्थिक मंदी के उबरने के लिए और क्या उपाय किए जाएँ.

सम्मेलन शुरु होने से पहले सेंट एंड्र्यूज़ में विरोध प्रदर्शन कर रहे कुछ लोगों को पुलिस ने हिरासत में लिया है.

ब्रितानी वित्त मंत्री ने उम्मीद जताई कि इस सम्मेलन के अंत तक एक आर्थिक पैकेज पर सहमति बन सकेगी जिसका इस्तेमाल ग़रीब देशों द्वारा जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए किया जाएगा.

विरोधाभास

जी-20 देश के कुछ सदस्य, जैसे अमरीका, जापान और जर्मनी अब आर्थिक मंदी के दौर से उबरते हुए दिख रहे हैं इसलिए वो अब चर्चा करना चाहते हैं कि आर्थिक विकास की दर को किस तरह बढ़ाया जाए लेकिन अभी भी मंदी से जूझ रहा ब्रिटेन कुछ एहतियात के साथ चलना चाहता है.

जैसा कि अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष ने कहा है, वर्ष 2014 तक जी-20 देशों का सरकारी खर्च, उनके सकल घरेलू आय की तुलना में 118 प्रतिशत हो जाने के आसार हैं.

Image caption वैश्वीकरण के विरोधियों ने इस सम्मेलन का विरोध किया है

मुद्राकोष के पैमाने के अनुसार इसे सुरक्षित स्तर तक नीचे लाने के लिए कई बरसों तक खर्च में कटौती आदि की ज़रुरत पड़ेगी इसलिए फ़्रांस जैसा देश अभी भी दबाव बना रहा है कि बैंकों में भारी भरकम बोनस देने पर रोक को बरकरार रखा जाए.

अगले महीने कोपेनहेगन में होने वाले जलवायु परिवर्तन सम्मेलन से पहले जी-20 देशों के सामने एक बड़ा सवाल जलवायु परिवर्तन से निबटने के लिए विकासशील देशों के लिए धनराशि उपलब्ध करवाने का है.

ऐसे समय में जब कोपेनहेगन में क्योटो संधि के बदले एक नई संधि पर सहमति के आसार कम ही नज़र आ रहे हैं, कुछ देश चाहते हैं कि इस मुद्दे पर जी-20 के फ़ोरम में ही बात हो जानी चाहिए.

ब्रिटेन सहित कई देश कह चुके हैं और संयुक्त राष्ट्र के अधिकारी संकेत दे चुके हैं कि क़ानूनी रुप से बाध्यकारी किसी संधि पर सहमति के आसार फ़िलहाल नहीं दिख रहे हैं.

कुछ और देश चाहते हैं कि इस मुद्दे पर अमरीका का रुख़ पहले साफ़ हो जाए.

लेकिन लगता है कि इस समय अमरीका की प्राथमिकता स्वास्थ्य सेवाओं को दुरुस्त करना है और जलवायु परिवर्तन का विधेयक संसद में कुछ धीमी रफ़्तार से ही आगे सरक रहा है.

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