'सोवियत संघ का विघटन ग़लत'

बर्लिन की दीवार
Image caption दुनिया भर में अधिकतर लोग मानते हैं कि पूंजीवादी व्यवस्था ठीक काम नहीं कर रही है.

भारत के पैंतीस प्रतिशत लोगों का मानना है कि सोवियत संघ का विघटन एक नकारात्मक घटना थी जबकि 29 प्रतिशत लोग इसे सकारात्मक घटना मानते हैं.

बर्लिन की दीवार गिराए जाने की बीसवीं सालगिरह पर बीबीसी वर्ल्ड सर्विस के एक सर्वे में ये बात सामने आई है.

भारत उन सात देशों में से एक है जहां अधिक संख्या में लोग सोवियत संघ के विघटन को नकारात्मक घटना मानते हैं.

इतना ही नहीं भारत की 34 प्रतिशत आबादी का मानना है कि पूंजीवादी व्यवस्था में समस्याएं हैं लेकिन इन्हें नियमों के ज़रिए ठीक किया जा सकता है.

हालांकि 23 प्रतिशत वैकल्पिक व्यवस्था की ज़रुरत पर ज़ोर देते हैं और 13 प्रतिशत मानते हैं कि मुक्त बाज़ार अब अच्छे से काम करेगा.

दुनिया भर के 27 देशों में 29 हज़ार लोगों के बीच किए गए इस सर्वेक्षण के अनुसार सिर्फ़ 11 प्रतिशत लोग मानते हैं कि पूंजीवादी व्यवस्था सही ढंग से काम कर रही है.

ऐसा माना जाता है कि बर्लिन की दीवार गिरने के बाद कम्युनिस्ट नेताओं के हाथ से सत्ता चली गई और पूर्वी यूरोप के देशों में पूंजीवादी अर्थव्यवस्था आई.

इन व्यवस्था के तहत मुक्त बाजा़र, निजीकरण और प्रतिद्वंद्विता को बढ़ावा मिला लेकिन बीस साल के बाद मात्र 11 प्रतिशत मानते हैं कि ये व्यवस्था ठीक काम कर रही है.

सर्वेक्षण के अनुसार दुनिया भर के अधिकांश लोग चाहते हैं कि सरकारें बिजनेस और उद्योगों पर अपनी लगाम रखें.

जिन लोगों से बातचीत की गई उसमें से दो तिहाई लोगों ने कहा कि वो इस बात का समर्थन करते हैं कि सरकारें धन संपदा और बेहतर तरीके से वितरण करें.

भारत में भी क़रीब 35 प्रतिशत लोग मानते हैं कि सरकारों को प्रमुख उद्योगों का नियंत्रण अपने हाथ में लेना चाहिए जबकि 29 प्रतिशत चाहते हैं कि सरकार को नियंत्रण कम करना चाहिए.

19 प्रतिशत लोग यथास्थिति से खुश दिखे. जहां तक धन संपदा के वितरण की बात है तो भारत के 40 प्रतिशत लोगों ने इस बात का समर्थन किया कि सरकारों को इसमें बड़ी भूमिका निभानी चाहिए.

28 प्रतिशत लोग धन वितरण में सरकार की कम भूमिका के पक्ष में थे जबकि 15 प्रतिशत लोग यथास्थिति के पक्षधर थे.

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