'चीन की भूमिका सीमित करने की कोशिश नहीं'

ओबामा
Image caption ओबामा ने कहा अमरीका उत्तर कोरिया की धमकियों से डरने वाला नहीं है

अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने अमरीका की एशियाई क्षेत्र, विशेष तौर पर जापान और दक्षिण एशिया की सुरक्षा के बारे में प्रतिबद्धता पर ज़ोर दिया है. साथ ही उन्होंने ये भी कहा है कि अमरीका का ऐसा कोई प्रयास नहीं है कि विश्व स्तर पर बढ़ती चीन की भूमिका को सीमित किया जाए.

अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा पद संभालने के बाद पहली बार एशिया का नौ दिन का दौरा कर रहे हैं. वे इस दौरान पहले जापान पहुँचे हैं और फिर सिंगापोर, चीन और दक्षिण कोरिया जाएँगे. उन्होंने जापान की राजधानी टोक्यो में एक अहम भाषण में अपने विचार व्यक्त किए हैं.

'अमरीकियों की ज़िंदगी से जुड़ा क्षेत्र'

टोक्यो के सुनटोरी हॉल में अपने संबोधन में राष्ट्रपति ओबामा ने कहा, "इस क्षेत्र के बारे में हमारी प्रतिबद्धता यहाँ से शुरु होती है लेकिन यहाँ पर ख़त्म नहीं होती है. मैं चाहता हूँ कि हर अमरीकी ये जाने कि ऐसा इसलिए हैं क्योंकि ये क्षेत्र हमारी ज़िंदगी से सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है. हम यहाँ व्यापार करते हैं और अपने इस्तेमाल का काफ़ी सामान यहाँ से ख़रीदते हैं. हम इसी क्षेत्र को अपने ज़्यादातर उत्पाद निर्यात करते हैं जिससे अमरीका में नौकरियाँ पैदा होती हैं."

राष्ट्रपति ओबामा का कहना था कि अमरीका को चीन के साथ व्यावहारिक सहयोग की ज़रूरत है क्योंकि 21वीं सदी की चुनौतियाँ का कोई भी देश अकेले सामना नहीं कर सकता है.

चीन के संदर्भ में अमरीकी राष्ट्रपति ने स्पष्ट कहा, "विश्व स्तर पर चीन की बड़ी भूमिका निभाने के प्रयासों का हम स्वागत करते हैं. इस भूमिका में चीन की बढ़ती अर्थव्यवस्था के साथ-साथ उसकी ज़िम्मेदारियाँ भी जुड़ी हैं. अमरीका की ऐसी कोई कोशिश नहीं है कि चीन को सीमित किया जाए. बल्कि इसके उलट समृद्ध सशक्त चीन का आगे बढ़ना विश्व के देशों के लिए शक्ति का स्रोत हो सकता है."

राष्ट्रपति ओबामा ने कह, "परमाणु हथियार न बनाए बिना, परमाणु तकनीक को शांतिपूर्ण ऊर्जा मकसदों के लिए इस्तेमाल करने में जापान की सफलता की मिसाल हमारे सामने है. अमरीका अपनी परमाणु शक्ति का इस्तेमाल अपने सहयोगियों - जापान और दक्षिण कोरिया की रक्षा के लिए इस्तेमाल करता रहेगा."

उत्तर कोरिया के बारे में बोलते हुए अमरीकी राष्ट्रपति ने कहा कि अमरीका धमकियों से डरने वाला नहीं है और अपनी कार्रवाइयों के ज़रिए स्पष्ट संदेश देता रहेगा. उनका कहना था कि उत्तर कोरिया के अंतरराष्ट्रीय समुदाय को किए वादों को न निभाने से सुरक्षा घटेगी, बढ़ेगी नहीं.

संबंधित समाचार