'भूख से निपटने के लिए सम्मलित प्रयास ज़रूरी'

भूख (फ़ाइल फ़ोटो)
Image caption माना जा रहा है कि लाखों लोग भुखमरी की चपेट में हैं

इटली की राजधानी रोम में खाद्य सम्मेलन हो रहा है जिसमें इस बात पर चर्चा हो रही है कि दुनिया भर में भूख से जूझ रहे क़रीब एक अरब लोगों की समस्या से कैसे निपटा जाए.

सम्मेलन की शुरुआत में संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने कहा कि भूख जैसी समस्या से निपटने के लिए सभी देशों के सम्मिलित प्रयास की ज़रूरत है.

हालांकि सम्मेलन में दुनिया के तमाम धनी देश हिस्सा नहीं ले रहे हैं.

रोम में संयुक्त राष्ट्र के महासचिव बान की मून ने कहा है कि दुनिया भर के ग़रीब लोग भूख के एक भयानक दुष्चक्र में फँस गए हैं और लाखों लोग भुखमरी की चपेट में हैं.

उन्होंने कहा कि खाने की चीज़ों की क़ीमत बढ़ने का असर ये होता है कि वे शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी दूसरी ज़रूरतों को पूरा नहीं कर पाते हैं.

बड़ी चुनौती

दुनिया में भर में 30 से अधिक देश ऐसे हैं जिन्हें संयुक्त राष्ट्र खाद्य कार्यक्रम के ज़रिए अनाज उपलब्ध कराया जाता है.

संयुक्त राष्ट्र महासचिव का कहना है,"असली चुनौती लोगों को खाना उपलब्ध कराना नहीं है बल्कि उन्हें इस स्थिति में पहुँचाना है कि वे ख़ुद अपना पेट भर सकें."

संयुक्त राष्ट्र से जुड़ी संस्था फूड एंड एग्रीकल्चर ऑर्गेनाइज़ेशन (एफ़एओ) के प्रमुख ज्याक दियौफ़ का कहना है कि विकासशील देश इस दिशा में काम तो कर रहे हैं लेकिन उन्हें अभी और बहुत कुछ करने की ज़रूरत है.

दियौफ़ ने कहा," विकासशील देशों को अपने बजट का कम से कम दस प्रतिशत हिस्सा कृषि पर ख़र्च करना चाहिए."

उन्होंने अपने भावपूर्ण भाषण में कहा कि भूख के मानवीय पहलू के बारे में सोचना चाहिए, उन्होंने याद दिलाया कि हर तीस सेकेंड में पाँच बच्चे भूख की वजह से अपनी जान गँवा देते हैं.

उन्होंने कहा कि वर्ष 2007 में खाद्यान्न की क़ीमतें जब बहुत बढ़ गई थीं तो कई तरह के वादे अंतरराष्ट्रीय बिरादरी ने किए थे लेकिन उनमें से ज्यादातर वादे पूरे नहीं हुए हैं.

उन्होंने एक मिसाल दी कि दुनिया भर के विकासशील देशों को 44 अरब डॉलर की खाद्य सहायता की ज़रूरत है जबकि विकसित देश उससे आठ गुना अधिक रकम अपने किसानों को सब्सिडी देने में हर साल ख़र्च कर देते हैं.

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