ओबामा चीन में, आज मुलाक़ात युवाओं से

बराक ओबामा
Image caption बराक ओबामा शंघाई में चीनी युवाओं से मिलेंगे

अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा चीन के अपने पहले औपचारिक दौरे में सबसे पहले शंघाई पहुँचें हैं जहां सोमवार को वो चीनी युवाओं से मिलेंगे.

ओबामा चाहते थे कि चीन में उनकी मुलाक़ात वहां के युवाओं से हो और वो उनके कुछ सवालों के जवाब भी दें जिसका प्रसारण भी किया जाए.

लेकिन ऐसे विषय चीन में हमेशा से ही संवेदनशील रहे हैं. और इस विषय पर चीन और अमरीका के अधिकारीयों की बातचीत दो हफ़्ते से ज्यादा चली है कि अमरीकी जनसभाओं की तर्ज़ पर " टाऊन हॉल " किस्म की ये मुलाक़ात कहां और किस तरह से हो.

इस मुलाक़ात के टीवी पर राष्ट्रीय स्तर के प्रसारण के लिए अमरीकी प्रशासन काफी इछुक है. लेकिन चीन का प्रशासन ऐसा करने देगा, इसकी संभावना कम है.

लेकिन इसे टीवी और इंटरनेट पर किसी न किसी रूप में दिखाया जाएगा. चीन की सरकारी मीडिया ने इसके लिए युवाओं से प्रश्न भी मंगवाएं हैं.

कई प्रश्नों में ये भी पूछा गया है कि क्या बराक ओबामा का चीन के निर्वासित तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा से मिलने का कोई कार्यक्रम है?

बीजिंग दलाई लामा को अलगाववादी मानता है.

बराक ओबामा ने इस चीन यात्रा के दौरान अपनी इस प्रतिबद्धता के प्रति और दृढ़ता व्यक्त की है कि वो इस क्षेत्र की महाशक्ति के साथ अपने रिश्ते और मज़बूत करना चाहेंगे.

बराक ओबामा चीन के राष्ट्रपति हू जिन्ताओ से मंगलवार को बीजिंग में मिलेंगे.

Image caption शंघाई में ओबामा के स्वागत की तैयारी

इस मुलाक़ात के दौरान आर्थिक असंतुलन, ईरान और उत्तरी कोरिया के परमाणु कार्यक्रम और जलवायु परिवर्तन संबंधी विषयों पर चर्चा होगी.

ओबामा ने ये भी संकेत दिए हैं कि वो बीजिंग के साथ अपनी बातचीत में चीन में मानवाधिकार हनन के मुद्दे को भी उठाएंगे, लेकिन उन्होंने ख़ास तौर पर इस विषय में तिब्बत का ज़िक्र नहीं किया है.

इससे पहले इस हफ़्ते की शुरुआत में टोकियो में ओबामा ने कहा था कि वो एक मज़बूत चीन का स्वागत करते हैं.

उन्होंने ये भी स्पष्ट किया था कि अमरीका और चीन के बेहतर आपसी रिश्तों का मतलब ये नहीं होता कि इस क्षेत्र में अमरीका के सहयोगियों से उसके रिश्ते कमज़ोर होंगे.

चीन की एक पत्रिका ग्लोब ने कहा है कि अमरीका और चीन के रिश्तों पर हुए एक ऑनलाइन सर्वे में जिन लोगों ने जवाब दिया, उनमे से अस्सी प्रतिशत चीनियों का मानना है कि अमरीका नहीं चाहता कि चीन उन्नति करे.

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