मनमोहन-ओबामा मुलाक़ात आज

मनमोहन सिंह और बराक ओबामा (फ़ाइल फ़ोटो)
Image caption पिछले कुछ बरसों में भारत और अमरीका के बीच संबंध मज़बूत हुए हैं

अमरीका यात्रा पर गए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की मुलाक़ात मंगलवार को राष्ट्रपति बराक ओबामा से होने जा रही है.

यह मुलाक़ात भारतीय समयानुसार शाम साढ़े सात बजे होनी है.

भारतीय प्रधानमंत्री ओबामा प्रशासन के पहले राजकीय अतिथि हैं.

दोनों नेताओं के बीच असैन्य परमाणु समझौते को आगे बढ़ाने, चरमपंथ से निपटने के उपायों, आर्थिक सहयोग बढ़ाने से लेकर रणनीतिक सहयोग तक कई अहम मुद्दों पर बात होगी.

जलवायु परिवर्तन के विवादास्पद मुद्दे पर दोनों देशों के बीच एक सहमति पत्र पर हस्ताक्षर होने की संभावना है.

कई विषयों पर चर्चा

जब जॉर्ज बुश राष्ट्रपति पद से सेवानिवृत्त हुए तो भारत और अमरीका के संबंध अपने चरम पर थे.

लेकिन बराक ओबामा के सत्ता संभालने के बाद से अफ़ग़ानिस्तान और पाकिस्तान उनकी प्राथमिकता सूची में सबसे ऊपर रहा है और हाल ही में एशिया के दौरे के दौरान उन्होंने साफ़ संकेत दिए हैं कि एक उभरती अर्थव्यवस्था के रुप में वे चीन ख़ासा महत्व देते हैं.

बीबीसी के वॉशिंगटन संवाददाता रिचर्ड लिस्टर का कहना है कि भारत की इस शंका को दूर करने के लिए कि अमरीका से उसकी दूरी बढ़ तो नहीं रही है, व्हाइट हाउस में मनमोहन सिंह का स्वागत ऐसी गर्मजोशी के साथ करने की तैयारी है, जैसा कि आमतौर पर किसी विदेशी मेहमान के साथ नहीं होता है.

दोनों नेताओं की बातचीत ख़त्म होने के बाद दोनों एक संयुक्त संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करेंगे और उसके बाद मनमोहन सिंह के सम्मान में रात्रिभोज का आयोजन किया गया है.

लेकिन इससे पहले दोनों नेताओं को कुछ कड़ुए सवालों के जवाब तलाश करने की कोशिश करनी है.

जलवायु परिवर्तन उन मुद्दों में से एक है.

अमरीका का कहना है कि जलवायु परिवर्तन से निपटने की ज़िम्मेदारी विकसित देशों के साथ विकासशील देशों को भी संभालनी होगी. लेकिन भारत का कहना है कि वह अपने विकास को बाधित नहीं कर सकता.

भारत और अमरीका के बीच पिछले पाँच बरसों में व्यापार दोगुना हो गया है और अब अमरीका की ऊर्जा कंपनियाँ चाहेंगीं कि उन्हें भारत के बाज़ार में और मौक़े मिलें.

चरमपंथ से निपटने के लिए ओबामा ज़रुर चाहेंगे कि भारत की ओर से सहयोग बढ़े और बदले में मनमोहन सिंह की ओर से यह मांग उठ सकती है कि पाकिस्तान में चल रही भारत विरोधी चरमपंथी गतिविधियाँ रोकने के लिए अमरीका अपने प्रभाव का इस्तेमाल करे.

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