जलवायु परिवर्तन पर कोष बनाने का प्रस्ताव

गॉर्डन ब्राउन
Image caption ब्राउन ने 10 अरब डॉलर का कोष बनाने का प्रस्ताव रखा

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री गॉर्डन ब्राउन 10 अरब डॉलर का एक कोष स्थापित करने का प्रस्ताव रख रहे हैं ताकि विकासशील देशों को ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन कम करने के लिए प्रोत्साहित किया जा सके.

त्रिनिडाड के पोर्ट ऑफ़ स्पेन शहर में आयोजित राष्ट्रमंडल सम्मेलन के दौरान जलवायु परिवर्तन को प्रमुख एजेंडा रखा गया है. सात दिसंबर से कोपेनहेगन में जलवायु परिवर्तन पर होने वाली बातचीत से पहले इस सम्मेलन को काफ़ी अहम माना जा रहा है.

सम्मेलन में प्रस्ताव पेश करते हुए गॉर्डन ब्राउन ने कहा कि इस समस्या से निपटने की तुरंत आवश्यकता है.

उन्होंने कहा, "मैं एक कोष स्थापित करने का प्रस्ताव रख रहा हूँ ताकि हम जितना जल्दी संभव हो, जलवायु परिवर्तन से निपटने की दिशा में आगे बढ़ सकें. मेरा मानना है कि 10 अरब डॉलर का कोष बेहतर होगा. इसमें दुनिया के सबसे धनी देशों में से कुछ देश सहयोग देंगे. हम यह सुनिश्चित करने की कोशिश करेंगे कि जलवायु परिवर्तन के प्रभावित देशों को सहायता मिल सके."

राष्ट्रमंडल महासचिव कमलेश शर्मा ने भी धनी देशों से अपील की कि वे जलवायु परिवर्तन के ख़तरों से निबटने के लिए ग़रीब देशों की बढ़-चढ़ कर मदद करें.

उन्होंने कहा, "ग़रीब देशों के प्रति धनी देशों का बहुत ही स्पष्ट दायित्व है. राष्ट्रमंडल के कई देशों पर अस्तित्व का संकट है. कार्बन उत्सर्जन में इन देशों की भूमिका नहीं के बराबर है, लेकिन संकट का सामना, सबसे पहले उन्हें ही करना पड़ेगा."

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक कोष स्थापित करने के गॉर्डन ब्राउन के प्रस्ताव को फ़्रांस के राष्ट्रपति निकोला सार्कोज़ी की ओर से भी समर्थन मिला है.

प्रस्ताव

गॉर्डन ब्राउन ब्रिटेन की ओर से इस कोष में 80 करोड़ डॉलर देने की पेशकश कर रहे हैं. उनका कहना है कि ग़रीब और विकासशील देशों को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता है ताकि उन्हें ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन कम करने के लिए राज़ी किया जा सके.

फ़्रांस के राष्ट्रपति निकोला सार्कोज़ी के साथ-साथ डेनमार्क के प्रधानमंत्री लार्स लोगे रासमूसेन ने भी धनी देशों से अपील की कि वे जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर ग़रीब देशों की मदद करें.

पहली बार राष्ट्रमंडल शिखर सम्मेलन में संगठन से बाहर के देशों के नेताओं को भी आमंत्रित किया गया है.

सम्मेलन में भाग लेने वालों में फ़्रांस के राष्ट्रपति निकोला सार्कोज़ी, डेनमार्क के प्रधानमंत्री रासमूसेन और संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून शामिल हैं.

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