'लादेन को पकड़ने का मौका गंवाया'

ओसामा बिन लादेन
Image caption रिपोर्ट के मुताबिक आठ साल पहले ही गिरफ़्त में आ चुका था लादेन

अमरीकी सीनेट की एक समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि आठ साल पहले ओसामा बिन लादेन अफ़ग़ानिस्तान में अमरीकी सेनाओं की पकड़ में लगभग आ चुका था लेकिन इस कार्रवाई को अंजाम देने के लिए और अधिक सैनिक सहायता की मांग को ठुकरा दिया गया.

इस रिपोर्ट को तैयार करने वालों में ज़्यादातर सीनेटर डेमॉक्रेट हैं.

रिपोर्ट में अल क़ायदा नेता ओसामा बिन लादेन का पीछा करने और उसको पकड़ने में अपने सभी सैनिक संसाधनों का इस्तेमाल न कर पाने के लिए पूर्ववर्ती बुश प्रशासन और उनके सैन्य अधिकारियों की आलोचना की गई है.

ये रिपोर्ट ऐसे समय में आई है जबकि राष्ट्रपति बराक ओबामा अफ़ग़ानिस्तान में और अधिक सैनिकों को भेजने के बारे में जल्द ही कोई घोषणा करने वाले हैं.

रिपोर्ट में इस बात पर ज़ोर दिया गया है कि साल 2001 में बिन लादेन को पकड़ने या मारने में नाकाम रहने का मतलब है कि एक बहुत बड़ा मौक़ा गंवा देना क्योंकि उस वक्त लादेन की स्थिति काफी संवेदनशील थी. और उसी वजह से आज अफ़ग़ानिस्तान में चरमपंथी घटनाओं और पाकिस्तान में आंतरिक अशांति की बुनियाद पड़ी.

ये रिपोर्ट साल 2004 में राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार रहे जॉन केरी के अनुरोध पर तैयार की गई है.

जॉन केरी इस बात को लेकर लंबे समय से बहस कर रहे हैं कि 9/11 की घटना के महज़ तीन महीने बाद गिरफ़्त में आए अल क़ायदा नेता और उसके सहयोगियों को पकड़ने का मौक़ा हम कैसे चूक गए.

हालांकि ये रिपोर्ट अफ़ग़ानिस्तान में आठ साल के दौरान सैनिक कार्रवाई की समीक्षा तक ही सीमित है लेकिन ये उन लोगों के लिए एक चेतावनी के तौर पर भी देखी जा सकती है जो लोग अफ़ग़ानिस्तान में और सैनिकों को भेजने का विरोध कर रहे हैं.

रिपोर्ट का कहना है, "आठ साल पहले युद्ध क्षेत्र से अल क़ायदा नेता को भगा देने का मतलब ये नहीं था कि दुनिया चरमपंथी ख़तरों से सुरक्षित हो जाती, लेकिन उसे पाकिस्तान भागने के लिए दरवाज़े खोल देने के निर्णय ने ऐसी स्थिति ज़रूर पैदा कर दी जिससे कि चरमपंथी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए उसे धन मिलता रहा है और वो दुनिया भर में धर्मोन्माद बढ़ाता रहा."

रिपोर्ट में साफ़ तौर पर कहा गया है कि जब अमरीकी सेनाओं ने अफ़ग़ानिस्तान में कार्रवाई की उस वक़्त ओसामा बिन लादेन तोरा बोरा की पहाड़ियों में छिपा था और 16 दिसंबर 2001 के बाद लादेन और उसके साथी भागकर पाकिस्तान के क़बायली इलाक़े में जा छिपे.

रिपोर्ट में कहा गया है कि आज भी इन लोगों के वहीं छिपे होने की आशंका है.

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