ईरान के तेवर पर पश्चिमी देश गरम

राष्ट्रपति अहमदीनेजाद नतांज़ परमाणु केंद्र में
Image caption नए संयंत्रों का आकार नतांज़ में मौजूद संयंत्र के समान होगा

ईरान सरकार ने देश में यूरेनियम संवर्धन के 10 नए संयंत्र लगाने की योजना को मंज़ूरी दे दी है.

ईरान के सरकारी मीडिया के अनुसार नए संयंत्रों में से पाँच के निर्माण पर काम तुरंत शुरू हो जाएगा, जबकि पाँच अन्य के लिए दो महीने के भीतर जगह ढूंढे जाने की संभावना है.

नए संयंत्र नतान्ज़ के मौजूदा संयंत्र के बराबर आकार के होंगे. ईरान की इस घोषणा पर अमरीका और ब्रिटेन ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है. अमरीका का कहना है कि ईरान अपनी वचनबद्धता का उल्लंघन कर रहा है जबकि ब्रिटेन ने ईरान के फ़ैसले पर गहरी चिंता जताई है.

अमरीका का कहना है कि ईरान ख़ुद ही अपने को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग कर रहा है.

व्हाइट हाउस के प्रवक्ता रॉबर्ट गिब्स ने कहा कि परमाणु कार्यक्रम पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता का जवाब देने के लिए ईरान के पास अब कम समय रह गया है.

दूसरी ओर ब्रिटेन का कहना है कि और यूरेनियम संवर्धन संयंत्र बनाने का फ़ैसले संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव का जान-बूझकर किया गया उल्लंघन है.

ब्रिटेन का कहना है कि ईरान के फ़ैसले पर वह अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी और अन्य सहयोगी देशों के साथ मिलकर वह क़दम उठाएगा. जर्मनी ने भी ईरान की घोषणा पर चिंता जताई है.

तेहरान में बीबीसी संवाददाता जॉन लाइन के अनुसार नए संवर्धन संयंत्रों की स्थापना की घोषणा कर पश्चिमी देशों के प्रति ईरान के आक्रामक तेवर के रूप में देखा जाएगा.

ईरान का ये क़दम सुरक्षा परिषद प्रस्तावों के ख़िलाफ़ भी होगा, लेकिन ईरान का कहना है कि परमाणु अप्रसार संधि के तहत मिले अधिकारों का ही इस्तेमाल कर रहा है.

कम सहयोग

इससे पहले ईरानी संसद ने राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद से कहा है कि वे अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) से सहयोग कम कर दें. संसद ने परमाणु कार्यक्रम को लेकर ईरान पर बढ़ते अंतरराष्ट्रीय दबाव के मद्देनज़र ये क़दम उठाया है.

उल्लेखनीय है कि अभी शुक्रवार को ही आईएईए ने परमाणु कार्यक्रम को लेकर ईरान के ख़िलाफ़ एक निंदा प्रस्ताव पारित किया था.

इस बारे में ईरानी संसद के स्पीकर अली लारीजानी ने कहा, “ आईएईए का प्रस्ताव यही साबित करता है कि पश्चिमी शक्तियों की रूचि मामले का समाधान ढूंढने में नहीं, बल्कि एक क़िस्म की राजनीतिक जालसाज़ी को आगे बढ़ाने में है. वरना वे फ़ोर्दो यूरेनियम संवर्धन केंद्र शुरू करने की हमारी घोषणा का स्वागत करते, उसे हमारे ख़िलाफ़ प्रस्ताव पारित करने का आधार नहीं बनाते.”

पश्चिमी देश आरोप लगाते हैं कि ईरान परमाणु हथियार विकसित करने में जुटा हुआ है, जबकि ईरान बार-बार यही कहता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण कार्यों के लिए है.

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