दुबई में भारतीयों की नौकरी ख़तरे में

दुबई
Image caption दुबई में आर्थिक संकट की आशंका

दुबई संकट का असर शेयर बाज़ार और निवेश पर कितना पड़ता है ये तो अभी देखने की बात है लेकिन दुबई में काम कर रहे लाखों भारतीयों का भविष्य ज़रूर अधर में दिख रहा है.

ऐसी ख़बरें आ रही हैं कि दुबई की विभिन्न कंपनियों में काम करने वाले भारतीय मूल के कई लोगों को नौकरियों से निकाल दिया गया है.

इनमें से कुछ तो ऐसे हैं जो ईद की छुट्टियां मनाने अपने घर आए थे और उन्हें फ़ोन पर ही कंपनी की ओर से कह दिया गया कि आपको नौकरी से निकाल दिया गया है.

मेरठ के शालीमार गार्डेन में रहने वाले साजिद दुबई की अल हामिद कांस्ट्रक्शन कंपनी में पिछले छह साल से काम कर रहे हैं. साजिद ने बीबीसी को बताया कि उन्हें ऐन ईद के दिन कंपनी की ओर से फ़ोन आया कि आपको अब वापस आने की ज़रूरत नहीं है और आपके बकाया पैसे और दूसरी चीजें आपके घर पहुंचा दी जाएंगी.

साजिद जैसे तमाम लोग हैं जिन्हें इस तरह की मनहूस सूचना या तो फ़ोन करके दी गई या फिर एसएमएस के ज़रिए.

Image caption यासेर अहमद ख़ान नहीं मानते कि संकट इतना बड़ा है

मेरठ के ही आसिफ़ हिताशी कंपनी में काम करते थे और उन्हें तीन महीने पहले ही बिना किसी कारण बताए नौकरी से निकाल दिया गया.

जब उन्होंने कंपनी के अधिकारियों से इसका कारण पूछा तो बताया गया कि कंपनी की माली हालत ठीक नहीं है.

साजिद का कहना है कि ऐसे उनके तमाम साथियों को नौकरियों से निकाला गया है और इनमें से ज़्यादातर कांस्ट्रक्शन कंपनियों में काम करने वाले मज़दूर स्तर के कर्मचारी थे.

अधिकारी सहमत नहीं

हालांकि दुबई में ही एक आईटी कंपनी में वरिष्ठ अधिकारी यासेर अहमद ख़ान से जब बीबीसी ने बात की तो उन्होंने ऐसे किसी भी संकट से इनकार किया. यासिर अहमद ख़ान ने फ़ोन के ज़रिए नौकरी से निकालने की बात को सिरे से ख़ारिज किया.

उनका कहना था, "यहां पैंतालीस से पचास प्रतिशत लोग भारत, पाकिस्तान, बंगलादेश, नेपाल जैसे देशों से आते हैं. इस क़िस्म की चर्चा दुबई में नहीं है. और इसमें सच्चाई भी नहीं है क्योंकि यहां के श्रम क़ानून गारंटी करते हैं कि सभी को साफ सुथरे ढंग से नौकरी के अवसर मिलें. और अगर किसी को नौकरी से निकालना भी है तो मेरी समझ में एसएमएस या फ़ोन उसका कोई ज़रिया नहीं है".

यासेर अहमद ख़ान दुबई में किसी भी तरह के आर्थिक संकट से भी इनकार करते हैं. वे कहते हैं, "सिर्फ डी पी वर्ल्ड एक कंपनी है जो कि क्राइसिस से गुज़र रही है और उसका इतना असर दुबई की अर्थव्यवस्था पर नहीं पड़ रहा है. और उसका भी बुरा वक़्त फ़िलहाल ख़त्म हो चुका है और अब परिस्थितियां सामान्य हो रही हैं".

दर असल नौकरी से निकालने की अचानक हुई ये घटनाएं इसलिए भी चौंकाने वाली हैं क्योंकि हाल ही में वित्त मंत्रालय समेत कई अन्य मंत्रालयों ने भी इस बात का आश्वासन दिया था कि दुबई के आर्थिक संकट का वहां काम कर रहे भारतीयों पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा.

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