पाकिस्तान पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ा

Image caption अमरीका ने पाकिस्तान से अल क़ायदा और तालेबान के ख़िलाफ़ कार्रवाई की मांग की.

पाकिस्तान पर फिर अंतरराष्ट्रीय दबाव पड़ रहा है कि वो अपने क़बाइली इलाक़े में सक्रिय अल क़ायदा और तालेबान चरमपंथियों से निपटने की और कोशिश करे.

हाल में अमरीका और ब्रिटेन ने स्पष्ट शब्दों में पाकिस्तान की विफलता की आलोचना की है.

इस बीच अमरीकी के दैनिक अख़बार 'वॉशिंगटन पोस्ट' ने कहा है कि अमरीका पाकिस्तान के साथ एक नई सामरिक साझेदारी करना चाहता है जिससे दोनों देशों के बीच व्यापार और सैन्य सहयोग बढ़े.

अख़बार ने अमरीकी अधिकारियों के हवाले से लिखा है अफ़ग़ानिस्तान की सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए पाकिस्तान में कुछ चीज़ें होना ज़रूरी है.

पाकिस्तान को चेतावनी

वॉशिंगटन पोस्ट ने लिखा है कि नवंबर के शुरु में जब अमरीका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अवकाशप्राप्त जनरल जेम्स जोंस इस्लामाबाद गए थे तो राष्ट्रपति ओबामा ने दो पृष्ठ का एक पत्र उनके हाथों भेजा था.

पत्र में लिखा था कि अगर पाकिस्तान अमरीका की मर्ज़ी के मुताबिक काम करेगा तो उसे अतिरिक्त सैन्य और आर्थिक सहायता मिलेगी और उसके साथ सामरिक साझेदारी बढ़ाई जाएगी.

लेकिन राष्ट्रपति ओबामा ने यह चेतावनी भी दी थी कि पाकिस्तान अपने नीतिगत लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए विद्रोही संगठनों का इस्तेमाल करना जारी नहीं रख सकता.

उन्होने कहा कि अगर पाकिस्तान आतंकवादियों से निपटने में सक्षम नहीं तो अमरीका जो कुछ भी तरीक़ा अपना सकता है अपनाएगा.

अमरीका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने यह संदेश पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ़ अली ज़रदारी को भेजा था.

राष्ट्रपति ओबामा ने पाकिस्तान के साथ सामरिक साझेदारी बढ़ाने का पेशकश भी की जिसमें अतिरिक्त सैन्य और आर्थिक सहयोग शामिल है.

इस पत्र में अमरीका ने पाकिस्तान को एक कड़ा संदेश भेजा है कि वो लश्करे तैबा जैसे विद्रोही संगठनों को सामरिक हथियार की तरह इस्तेमाल करना बंद करे.

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री गॉरडन ब्राउन ने भी पाकिस्तानी प्रशासन अल क़ायदा के नेताओं को न पकड़ पाने पर कुंठा व्यक्त की थी.

विश्लेषकों का मानना है कि भले ही पाकिस्तान के नेताओं को सार्वजनिक तौर पर और आर्थिक मदद के आश्वासन मिल रहे हैं लेकिन पर्दे के पीछे उन्हें कड़े संदेश दिए जा रहे हैं.

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