सद्दाम हुसैन के नाम पर आया टीवी चैनल

सद्दाम हुसैन
Image caption सद्दाम हुसैन के मारे जाने के बाद कई अलग-अलग प्रतिक्रियाएँ आईं थीं

अरब देशों के सैटेलाइट नेटवर्क पर एक नया चैनल दिख रहा है जो इराक के पूर्व राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन को समर्पित है.

ये चैनल उस दिन दिखा है जिस दिन इस्लामी कैलेंडर के मुताबिक सद्दाम हुसैन को फांसी दिए जाने की तीसरी बरसी थी.

ये अभी ज्ञात नहीं है कि इस चैनल के पीछे किसका नाम है.

इस चैनल पर सद्दाम हुसैन की तस्वीरें दिखती हैं, उनके भाषण सुनाए जाते हैं और उनकी लिखी कविताएँ भी ब्रॉडकास्ट होती हैं और इनकी पृष्ठभूमि में राष्ट्रभक्ति के गीत भी सुनाई देते हैं.

इसे इराक के बाहर से टेलीकास्ट किया जा रहा है और समीक्षक मानते हैं कि इसके पीछे सद्दाम हुसैन के समर्थकों का हाथ है.

सद्दाम हुसैन के परिवार और उनकी बाथ पार्टी के देश से निष्कासित कुछ नेताओं ने इससे अपना कोई संबंध होने से इंकार किया है.

एसोसिएटेड प्रेस समाचार एजेंसी ने कहा है कि उसने सीरिया की राजधानी दमिश्क में मोहम्मद जार्बुआ नाम के एक व्यक्ति से संपर्क किया है जो ख़ुद को इस चैनल का प्रमुख बताता है. लेकिन अभी इस व्यक्ति के इस दावे की पुष्टि नही हुई है.

एक आततायी का महिमामंडन

इराक़ की संसद के एक सदस्य जाबेर हबीब जाबेर ने इस चैनल की निंदा की है और कहा है कि "ये चैनल एक आततायी का महिमामंडन कर रहा है. "

बग़दाद के एक निवासी ने बीबीसी को बताया कि ये चैनल उनका पसंदीदा चैनल बन गया है लेकिन इसे देखकर वो दुखी भी हो जाते हैं क्योंकि ये उन्हें उन दिनों की याद दिलाता है जब इराक़ सुरक्षित हुआ करता था.

लेकिन बग़दाद में बीबीसी की नतालिया अन्तेलावा ने बताया है कि बग़दाद में ऐसे कई लोग हैं जो इस चैनल के लॉंच की खबर के प्रति उत्सुक नहीं हैं.

ये चैनल उस समय आया है जब इराकी प्रशासन अगले साल, 2010 में, जनवरी में होनेवाले आम चुनाव की तैयारी कर रहा है.

2003 में सद्दाम हुसैन दो दशक से ज्यादा लंबे समय तक सत्ता में रहने के बाद तब सत्ता से बाहर हुए थे जब अमरीका के नेतृत्व में इराक़ पर हमला हुआ था.

उन्हें बाद में पकड़ा गया, उनके खिलाफ कार्रवाई की गई और फिर उन्हें फांसी दे दी गई थी.

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