मंत्रिमंडल की एक अलग बैठक

हिमालय के ग्लेशियर
Image caption पृथ्वी के तापमान के बढ़ने से हिमालय के ग्लेशियर पिघल रहे हैं.

दो महीने पहले मालदीव के मंत्रिमंडल की पानी के नीचे बैठक हुई थी और शुक्रवार को नेपाल के मंत्रिमंडल की बैठक एवरेस्ट के बेस कैम्प में हो रही है. समुद्रों के जल स्तर के बढ़ने से मालदीव के द्वीपों के जलमग्न हो जाने का ख़तरा है.

उधर नेपाल के मंत्रिमंडल को भी उम्मीद है कि कुछ ही दिनों में जलवायु परिवर्तन पर कोपनहेगन में होने वाली अहम बैठक से पहले उनका ये क़दम पृथ्वी के बढ़ते तापमान से हिमालय के ग्लेशियरों पर हो रहे असर पर केंद्रित करेगा.

प्रधानमंत्री समेत पूरी मंत्रिमंडल कालिपतर जा रहा है जो समुद्र तट से 5000 मीटर की ऊँचाई पर है.

अनेक वैज्ञानिकों का कहना है कि ग्लेशियर ऐसी गति से पिघल रहे हैं कि एक अरब लोगों से अधिक का पानी का स्रोत ख़तरे में पड़ सकता है.

विशेषज्ञों का कहना है कि हिमालय के पिघलते ग्लेशियरों से उनसे निकलने वाली नदियों का भविष्य ख़तरे में पड़ जाएगा.

हिमालय को अनेक ख़तरे

नेपाल के मंत्रिमंडल की इस यात्रा का आयोजन कई निजी निपाली संस्थाओं ने किया है जिनमें से अनेक पर्यटन क्षेत्र से संबंधित हैं.

सुमन पांडे जो मंत्रिमंडल की बैठक के लिए इंतज़ाम कर रहे हैं, कहते हैं, "ये जगह समुद्र तट से काफ़ी ऊपर है और लोग इतनी ऊँचाई से बीमार पड़ सकते हैं. हमने हिमालय रेसक्यू एसोसिएशन की मदद से चिकित्सा व्यवस्था की है."

विशेषज्ञों का कहना है कि नेपाल में दुनिया के 14 सबसे ऊंचे पर्वत शिखर हैं.

नेपाल दुनिया के कुल ग्रीन हाउस गैस उत्सर्जन के केवल .025 प्रतिशत के लिए ज़िम्मेदार है लेकिन उसे इन शिखरों की बर्फ़ पिघलने का भारी ख़मियाज़ा भुगतना पड़ेगा.

हिमालय के हज़ारों ग्लेशियर एशिया की दस प्रमुख नदियों का स्रोत हैं जिन पर करोड़ों का जीवन निर्भर है. पृथ्वी के बढ़ते तापमान के कारण अगले पचास वर्षों में ये नदियाँ सूख सकती हैं.

पिछले सौ वर्षों में दुनिया का औसत तापमान 0.74 डिग्री सेल्सियस बढ़ा है लेकिन काठमांडू स्थित इंटरनेशनल सेंटर फ़ॉर माउंटेन डिवेलपमेंट का कहना है कि इसका असर हिमालय पर सबसे अधिक हुआ है.

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