साढ़े दस अरब डॉलर देगा यूरोप

Image caption ब्रिटेन और फ़्रांस ने विकासशील देशों के लिए बड़ी धनराशि की घोषणा की है

जलवायु परिवर्तन से निपटने में विकासशील देशों की मदद करने के लिए यूरोपीय संघ अगले तीन सालों में साढ़े दस अरब डॉलर देने को तैयार हो गया है.

इससे पहले ब्रिटेन और फ़्रांस के नेताओं ने ब्रसेल्स में एक पत्रकार वार्ता में बताया कि दोनों देश मिलकर अगले तीन सालों में कम से कम 40 करोड़ डॉलर देंगे.

दोनें देशों के नेताओं ने कहा है कि कोपेनहेगन सम्मेलन में अगर कोई समझौता होता है तो ग़रीब देशों के लिए (फ़ास्ट-स्टार्ट फंड) एक कोष तुरंत बनना चाहिए जिसमें हर साल 10 अरब डॉलर की ज़रूरत होगी.

गॉर्डन ब्राउन ने कहा, "हमारा ये क़दम दर्शाएगा कि जलवायु परिवर्तन के प्रति हम कितने गंभीर हैं. हमारा मकसद ये है कि यूरोपीय संघ 2020 तक गैस उत्सर्जन में तीस फ़ीसदी कटौती का वादा करे."

उनका कहना था कि शुरु में धनराशि का 20 फ़ीसदी हिस्सा जंगलों की रक्षा में जाना चाहिए. ब्रितानी प्रधानमंत्री ने ज़ोर देकर कहा कि कोपेनहेगन में होने वाला कोई भी समझौता छह महीने के अंदर-अंदर का़नूनी तौर पर बाध्य होना चाहिए.

वहीं फ़्रांससी राष्ट्रपति निकोला सार्कोज़ी ने बताया कि यूरोप और अफ़्रीका के बीच तालमेल बिठाने के लिए ब्रिटेन और फ़्रांस ने आपस में समन्वय करने का फ़ैसला किया है.

कोपेनहेगन में संभावित समझौते के मसौदे में अमीर देशों से अनुरोध किया गया है कि ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कटौती की सीमा को वे बढ़ाएँ.

कौन कितने पैसे देगा

यूरोपीय संघ ने जिस राशि का वादा किया है उसमें से वो कुल राशि अगले तीन सालों के दौरान देगा. इस बारे में जानकारी देते हुए स्वीडन के प्रधानमंत्री ने कहा कि सभी 27 देश इसमें योगदानल करेंगे.

उन्होंने कहा कि यूरोपीय संघ अपने हिस्से का योगदान कर रहा है. उन्होंने उम्मीद जताई कि दूसरे अमीर देश भी ऐसा करेंगे.

कोपेनहेगन मे जारी जलवायु परिवर्तन वार्ता पर इस घोषणा का सकारात्मक असर पड़ सकता है.

बीबीसी संवाददाता का कहना है कि ब्रिटेन और फ़्रांस का संयुक्त बयान एकता का प्रतीक था ताकि कोपेनहेगन में यूरोप के योगदान को बढ़ाया जा सके.हालांकि ये अभी स्पष्ट नहीं है कि संघ के बाकी देश कितना योगदान करेंगे.

यूरोपीय संघ के सम्मेलन में वित्तीय मामलों पर भी चर्चा हुई है.यूरोपीय संघ के नेताओं ने अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष से गुहार की है कि वो वित्तीय लेनदेन पर वैश्विक कर लगाने के बारे में सोचे ताकि बैंक ज़रूरत से ज़्यादा ज़ोखिम न उठा पाएँ जिससे कोई वित्तीय संकट खड़ा हो जाए.

इस बीच अमरीका में बहुदलीय सीनेट दल ने जलवायु पर एक नए बिल का प्रस्ताव रखा है.

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