तुर्कमेनिस्तान से पहुंचेगी गैस चीन तक

Image caption चीन के राष्ट्रपति हू जिन्ताओ ने तुर्कमेनिस्तान में एक नई गैस पाइप लाइन का उदघाटन किया.

चीन के राष्ट्रपति हू जिन्ताओ ने सोमवार को एक नई गैस पाइप लाइन का उदघाटन किया जिससे तुर्कमेनिस्तान की गैस उनके देश तक पहुंच सकेगी.

इस पाइप लाइन के ज़रिए तुर्कमेनिस्तान की गैस उज़बेकिस्तान और कज़ाकस्तान होती हुई चीन पहुंचेगी. चारों देशों के नेताओं ने उदघाटन में हिस्सा लिया.

गैस की यह पाइप लाइन मध्य एशिया से 1800 किलोमीटर का सफ़र तय करके चीन की पश्चिमी सीमा तक पहुंचती है.

वर्ष 2013 तक जब ये अपनी पूरी क्षमता से काम करने लगेगी तो 40 अरब क्यूबिक मीटर गैस लाया करेगी जो चीन की कुल मौजूदा खपत का आधा है.

इस समय चीन अपनी गैस की ज़रूरत अपने ही संसाधनों से पूरी कर रहा है.

लेकिन उसकी ज़रूरतें बढ़ेंगी. चीन की अर्थव्यवस्था का निरंतर विस्तार हो रहा है इसलिए उसे भविष्य में और अधिक ऊर्जा की ज़रूरत पड़ेगी. तुर्कमेनिस्तान में प्राकृतिक गैस का भारी भंडार है इसीलिए चीन इस पाइप लाइन की कोशिश कर रहा था.

रूस पर निर्भरता कम

इस पाइप लाइन से तुर्कमेनिस्तान को ये लाभ होगा कि उसे रूस पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा. तुर्कमेनिस्तान हर साल कोई 70 अरब क्यूबिक मीटर गैस का उत्पादन करता है. रूस उसका सबसे बड़ा ख़रीदार है.

तुर्कमेनिस्तान की अधिकतर गैस रूस के ज़रिए ही निर्यात होती रही है जिसकी वजह से दोनों देशों के बीच मतभेद भी उठते रहे हैं.

इसी साल के शुरु में एक पाइप लाइन में हुए विस्फोट के बाद रूस की सरकारी गैस कम्पनी गैज़प्रॉम ने तुर्कमेनिस्तान से गैस ख़रीदनी बंद कर दी थी.

उसके बाद से दोनों के बीच नई शर्तों पर सहमति नहीं बन पाई है जिससे तुर्कमेनिस्तान को कोई एक अरब डॉलर महीने का नुकसान हो रहा है.

इस घटना ने तुर्कमेनिस्तान के राष्ट्रपति को वैकल्पिक रास्ते विकसित करने को प्रेरित किया.

तुर्कमेनिस्तान से एक और गैस पाइप लाइन ईरान ले जाई जा रही है जो निर्माणाधीन है. साथ ही तुर्कमेनिस्तान ने यूरोपीय संघ समर्थित नबूको परियोजना में भी अपनी रुचि दर्शाई है.

ये नई पाइप लाइन तुर्कमेनिस्तान को एक नया रास्ता प्रदान कर रही है. इससे मध्य एशिया के अन्य देशों को भी लाभ होगा और उन्हे रूस से गैस की सप्लाई पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा. इस परियोजना का व्यापारिक और आर्थिक महत्व तो है ही राजनीतिक महत्व भी है.

विश्लेषकों का कहना है कि इस पाइप लाइन से चीन की आवश्यकताओं की पूर्ति तो होगी ही साथ ही इस क्षेत्र में उसका प्रभाव भी बढ़ेगा.

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