चीन ने जलवायु समझौते की तारीफ़ की

Image caption राष्ट्रपति ओबामा ने समझौते को महत्वपूर्ण बताया है

चीन और इंडोनेशिया ने कोपेनहेगन में जलवायु परिवर्तन सम्मेलन के नतीजे की सराहना की है.

हालांकि सहायता एजेंसियों और जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर मुहिम चलानेवालों ने इस पर निराशा व्यक्त की है.

चीन के विदेश मंत्री ने कहा कि ये नई शुरुआत है जबकि इंडोनेशिया के नेताओं ने नतीजों पर प्रसन्नता व्यक्त की है.

कोपेनहेगन समझौता को सम्मेलन में स्वीकार किया गया था लेकिन ये बाध्यकारी नहीं है.

इसके पहले अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कहा था कि कोपेनहेगन में जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर भारत, ब्राज़ील, चीन और दक्षिण अफ़्रीका के साथ हुआ समझौता एक महत्वपूर्ण सफलता है.

कई देशों ने समझौते को ख़ारिज किया

उन्होंने कहा कि इस समझौते ने उत्सर्जन कम करने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कार्रवाई की ज़मीन तैयार की है.

अमरीका और चारों देशों के बीच हुए समझौते में किसी उत्सर्जन कटौती को लेकर किसी क़ानूनी बाध्यता का ज़िक्र नहीं है. इस समझौते को सम्मेलन में सर्व सहमति से स्वीकार नहीं किया गया.

कुल मिलाकर बैठक से अपेक्षित नतीजे नहीं निकले लेकिन वॉशिंगटन पहुँचने पर ओबामा ने कहा कि पहली बार ऐसा हुआ कि जलवायु परिवर्तन पर क़दम उठाने के लिए दुनिया की सभी बड़ी अर्थव्यवस्थाएँ एक साथ आईं.

विरोध के स्वर

बीबीसी संवाददाता का कहना है कि कोपेनहेगन सम्मेलन नाकामी और मौक़ा चूक जाने के आरोप-प्रत्यारोपों के बीच ख़त्म हो गया है.

Image caption सहायता एजेंसियों ने समझौते को नाकाम बताया है

शुक्रवार देर रात अमरीका और कुछ प्रमुख विकासशील देशों के बीच जो समझौता हुआ है, उसके मुताबिक़ तापमान में बढ़ोत्तरी को दो सेल्सियस से भी कम रखने की बात कही गई है.

साथ ही अगले तीन वर्ष के दौरान विकासशील देशों को 30 अरब डॉलर की सहायता देने का वादा भी किया गया है.

इस समझौते के मुताबिक़ जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए ग़रीब देशों को 2020 तक हर साल 100 अरब डॉलर की सहायता देने की भी बात कही गई है.

समझौते में कार्बन उत्सर्जन में कमी के विकासशील देशों के वादे की निगरानी की प्रक्रिया तय करने का भी ज़िक्र है.

पहले चीन इसका विरोध कर रहा था लेकिन अमरीका के ज़ोर देने पर वो भी इसके लिए तैयार हो गया है.लेकिन अमरीका और कुछ प्रमुख विकासशील देशों के बीच हुए इस समझौते को लेकर कई देश नाराज़ हैं.

निकारागुआ और वेनेज़ुएला जैसे कई दक्षिण अमरीकी देशों का कहना है कि बिना किसी उचित प्रक्रिया के यह समझौता हुआ है. सम्मेलन की समाप्ति पर सिर्फ़ ये प्रस्ताव पारित हुआ कि ये सम्मेलन समझौते पर विचार करेगा.

पर्यावरण से जुड़े कार्यकर्ताओं और सहायता एजेंसियों ने इस समझौते को 'नाकाम और दंतहीन' समझौता कहा है.

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