ईरान के प्रमुख असंतुष्ट नेता का निधन

Image caption धार्मिक नेता मुंतज़री राष्ट्रपति अहमदीनेजाद के कड़े आलोचक थे

ईरान के प्रमुख असंतुष्ट धार्मिक नेता अयातुल्लाह हुसैन अली मुंतज़री का 87 साल की आयु में निधन हो गया है.

अयातुल्लाह हुसैन अली मुंतज़री ने ईरान में 1979 की क्रांति के दौरान प्रमुख भूमिका निभाई थी.

अयातुल्ला मुंतज़री को 1979 में हुई इस्लामिक क्रांति की आत्मा माने जाते थे. लेकिन वो अपने जीवनकाल में इस्लामिक क्रांति के एक स्तंभ से ईरानी नेतृत्व के सबसे मुखर आलोचक बन गए.

ये समझा जाता था कि इस्लामिक गणराज्य के संस्थापक अयातुल्लाह ख़ोमैनी के निधन के बाद वो ही सर्वोच्च नेता का पद पाएंगे लेकिन 1989 में ख़ोमैनी की मृत्यु से कुछ महीने पहले ईरान के मानवाधिकार रेकॉर्ड को लेकर दोनों के बीच मतभेद उभर आए और ये पद अयातुल्लाह अली ख़मनेई को मिल गया.

वर्ष 1997 में अयातुल्लाह मुंतज़री का अयातुल्लाह ख़मनेई से झगड़ा हो गया क्योंकि उन्होने सर्वोच्च नेता के अधिकारों पर सवाल उठाए.

इसके बाद मुंतज़री की धार्मिक संस्था को बंद कर दिया गया और क़ूम स्थित उनके कार्यालय पर हमला हुआ. उन्हें 6 साल के लिए घर में नज़रबंद कर दिया गया.

इसके बाद सरकारी मीडिया में उन्हे अल्प बुद्धि मौलवी के नाम से जाना जाने लगा. स्कूल की पाठ्यपुस्तकों से उनका नाम हटा दिया गया और उनके नाम पर रखे गए सड़कों के नाम बदल दिए गए.

आलोचक

शियाओं के वो सम्मानित नेता थे और साथ ही वो राष्ट्रपति अहमदीनेजाद के प्रमुख आलोचक थे.

बीबीसी संवाददाता जॉन लेएने का कहना है कि उनका निधन ऐसे कठिन दौर में हुआ है जब सरकार और विपक्ष के बीच टकराव की स्थिति बनी हुई है.

संवाददाता का कहना है कि ईरान के सत्ताधारी इस बात को लेकर चिंतित हैं कि विपक्ष उनके जनाज़े के दौरान भारी भीड़ जमा कर सकता है और 27 दिसंबर तक आशुरा (दसवीं मोहर्रम) तक ये जमावड़ा चल सकता है.

धार्मिक नेता मुंतज़री के बेटे ने बीबीसी को बताया कि उनके पिता की सामान्य मौत हुई है.

मुंतज़री ने जून में विवादास्पद चुनावों के बाद राष्ट्रपति अहमदीनेजाद के ख़िलाफ़ फतवा जारी किया था. ये पहला मौक़ा नहीं था जब वो सरकार से टकराए हों.

उन्होंने सरकार पर लगातार इस्लाम के नाम पर तानाशाही थोपने का आरोप लगाया.

उनका कहना था कि 1979 में क्रांति के बाद जो स्वतंत्रता मिलनी चाहिए थी, वो कभी नहीं मिली.

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