बढ़ रही है सामाजिक अशांति

Image caption शिन्जियांग में हुए साम्प्रदायिक दंगो में व्यापक हिंसा हुई

चीन के एक विचार मंच के विश्लेषण के अनुसार वहाँ सामाजिक अशांति बढ़ती जा रही है.

चीन की सामाजिक विज्ञान अकादमी की रिपोर्ट का कहना है कि देश पहले की अपेक्षा कहीं अधिक सामाजिक समस्याओं से जूझ रहा है.

सामाजिक स्थिरता के राष्ट्रव्यापी अभियान के बावजूद अपराध बढ़ गया है. हालांकि चीन में निरंतर हो रहे आर्थिक विकास के कारण बेरोज़गारी कम हुई है लेकिन वर्ष 2009 में चीन ने कहीं अधिक समाजिक संघर्ष देखे.

चीन के सामाजिक रुझानों पर आई यह रिपोर्ट देश के नीति निर्माताओं को गंभीर चेतावनी देती है.

इस रिपोर्ट के लेखकों का कहना है कि पिछले कुछ दशकों में सरकारी अधिकारियों के अन्यायपूर्ण व्यवहार और सत्ता के दुरुपयोग को लेकर आम लोगों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है.

इस रिपोर्ट में छह बड़े विरोध प्रदर्शनों का ज़िक्र किया गया है जिसमें हज़ारों लोगों ने हिस्सा लिया. इनमें पश्चिमोत्तर शिन्जियांग क्षेत्र में हुए साम्प्रदायिक दंगे शामिल नहीं हैं जिसमें कोई 200 लोग मारे गए थे.

शहरी-ग्रामीण अंतर

इस रिपोर्ट का कहना है कि आपराधिक घटनाओं में भी वृद्धि हुई है. जनवरी से अक्तूबर के आंकड़े दिखाते हैं कि इस अवधि में 40 लाख आपराधिक मामले दर्ज किए गए जो पिछले साल की तुलना में 15 प्रतिशत अधिक है.

रिपोर्ट में यह स्वीकार किया गया है कि चीन की कुछ नीतियां ऐसी रही हैं जिनकी वजह से देश के आर्थिक विकास का लाभ अधिक लोगों को नहीं मिल पाया है.

उदाहरण के लिए शहरों और देहातों के लोगों की आमदनी में अंतर और गहरा हो गया है. देश के सकल घरेलू उत्पाद में जो वृद्धि हुई है वह ग्रामीण आबादी, पर्यावरण और सामाजिक मेल मिलाप की क़ीमत पर हुई है.

ये रिपोर्ट प्रशासन के इस नारे पर गंभीर प्रहार है कि वो एक 'समरसतापूर्ण समाज' का निर्माण कर रहा है.

इस रिपोर्ट में आशा की एक किरण भी दिखाई देती है कि जहां एक तरफ़ चीनी प्रशासन प्रसार माध्यमों पर अपना शिकंजा कसता जा रहा है वहीं लोग इंटरनेट के माध्यम से अधिकारियों की कमियों और सत्ता के दुरुपयोग का पर्दाफ़ाश अधिक कर रहे हैं.

पिछले 12 महीनों में दस सबसे महत्वपूर्ण मामले इंटरनेट के ज़रिए सामने आए हैं.

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