भारत के हितों की रक्षा हुई: जयराम

जलवायु परिवर्तन पर सम्मेलन के दौरान प्रदर्शन
Image caption विपक्षी दल भाजपा के नेता अरुण जेटली ने इस समझौते के कई प्रावधानों पर आपत्ति जताई है

भारत के केंद्रीय पर्यावरण राज्यमंत्री जयराम रमेश ने कहा है कि कई विकसित देशों, विशेष तौर पर यूरोपीय देशों के प्रयासों के बावजूद जलवायु परिवर्तन पर कोपेनहेगन समझौते में क़ानूनी बाध्यता का नया प्रावधान नहीं है और यह एक बड़ी उपलब्धि है.

उन्होंने राज्यसभा को संबोधित करते हुए कहा कि कोपेनहेगन में विकासशील देशों के हितों की और भारत की संप्रभुता की रक्षा की गई है.

जयराम रमेश का कहना था,"….कोपनहेगन समझौते में क़ानूनी बाध्यता वाले कोई नए प्रावधान नहीं हैं और यह एक उपलब्धि है. कई यूरोपीय देशों की मंशा थी कि क्योटो प्रोटोकोल के प्रावधान ख़त्म हों...लेकिन भारत, चीन, दक्षिण अफ़्रीका और ब्राज़ील ने सुनिश्चित किया कि ऐसी कोशिशें सफल न हों."

उधर विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी के नेता अरुण जेटली ने कहा कि पर्यावरण राज्यमंत्री राष्ट्रीय हितों की रक्षा की बात तो कर रहे हैं लेकिन ये समझ में नहीं आ रहा है कि भारत ने समझ-बूझकर इस समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं या फिर अन्य लोग भारत से ज़्यादा चतुर निकले हैं.

अरुण जेटली का कहना था, "पूरे विश्व में निराशा है. कोपनहेगन समझौते को ग़रीब और कमज़ोर देशों के साथ धोखा बताया जा रहा है जबकि ताकतवर देशों से अंकुश हटा लिया गया है."

अरुण जेटली ने बार-बार कोपेनहेगन दस्तावेज़ का हवाला देते हुए कहा, "क्योटो संधि का ज़िक्र मात्र किया गया है....यदि कोपेनहेगन समझौते के तहत नए लक्ष्य निर्धारित किए जाने हैं और एक वैकल्पिक रास्ता अपनाया जाना है तो क्योटो का क्या अस्तित्व होगा...ये दस्तावेज़ ऐसा कहता तो नहीं है लेकिन जैसे ही वैकल्पिक रास्ता अपनाया जाता है, वैसे ही उसका मतलब होगा कि क्योटो के लक्ष्यों का कोई अस्तित्व नहीं रहा...क्योंकि एक ही लक्ष्य को पाने के लिए दो अलग-अलग रास्ते तो नहीं अपनाए जा सकते..."

सलाह और विश्लेषण का प्रावधान

पर्यावरण राज्यमंत्री जयराम रमेश ने कहा, "कोपेनहेगन समझौते पर आधारित दस्तावेज़ में अंतरराष्ट्रीय सलाह और विश्लेषण का प्रावधान है. इसके तहत (विभिन्न देशों की) कार्रवाई की राष्ट्रीय जानकारियों पर सलाह और विश्लेषण होगा. लेकिन इस दस्तावेज़ में ये सुनिश्चित किया गया है कि भारत की संप्रभुता का सम्मान हो.."

उनका कहना था कि ‘भारत अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा करने में कामयाब रहा है चाहे अभी भी कई ख़तरे हैं और भारत को सावधानी बरतते हुए बातचीत जारी रखनी होगी.'

जयराम रमेश ने राज्यसभा को बताया, "हमें ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में कमी लाने के लिए व्यापक राष्ट्रीय एजेंडा बनाना होगा जो कारगर साबित हो. बारहवीं पाँच-वर्षीय योजना के तहत लो कार्बन डेवेलप्मेंट (यानी कम कार्बन पर आधारित विकास) के लिए विस्तृत रोडमैप तैयार करना होगा..."

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