'अनुच्छेद 370 पर फ़ैसला लोग करें'

जम्मू कश्मीर से जुड़े मुद्दों पर अनुशंसा देने के लिए बनी पांचवी कार्य समिति या वर्किंग ग्रुप ने कहा है कि ये जम्मू-कश्मीर के लोगों को तय करना है कि वे संविधान के अनुच्छेद 370 के तहत विशेष दर्जा चाहते हैं या नहीं.

इस समिति का गठन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने किया था.

ग्रुप के चेयरमैन जस्टिस (सेवानिवृत्त) सगीर अहमद ने अपनी रिपोर्ट राज्य के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला को सौंपी.

रिपोर्ट में पहली अनुशंसा है, “ये जम्मू कश्मीर के लोगों को तय करना होगा कि वे कब तक अनुच्छेद 370 के वर्तमान रूप को मानना चाहते हैं और क्या वे इसे स्थाई दर्जा बनाना चाहते हैं या हमेशा के लिए इस दर्जे को ख़त्म कर देना चाहते हैं. मामला 60 साल पुरना है और इसे अब सुलझा लेना चाहिए- या इस पार या उस पार.”

अनुच्छेद 370 के तहत जम्मू कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा मिला हुआ है.

विशेष दर्जा

मुख्यमंत्री उमर अबदुल्ला की पार्टी नेशनल कॉंफ्रेंस स्वायत्तता की हिमायत करती है यानी राज्य को करीब-करीब संपूर्ण संप्रभुता- जैसे 1953 से पहले था.

ग्रुप ने ये अनुशंसा भी की है कि स्वायत्तता का सवाल और इसकी माँग को कश्मीर समझौते की परिपेक्ष में परखा जा सकता है या फिर किसी अन्य फ़ॉर्मूले के आधार पर जो प्रधानमंत्री को ठीक लगे ताकि जहाँ तक हो सके स्वायत्तता दी जा सके.

हालांकि ग्रुप ने ये भी कहा है कि स्व-शासन पर उसे पीडीपी का कोई ठोस दस्तावेज़ नहीं मिला.

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने मई 2006 में पांच कार्य समितियों का गठन किया था ताकि जम्मू-कश्मीर से जुड़े मुद्दों पर वे अनुशंसा दे सकें.

चार समितियाँ अपनी अनुशंसाएँ पहले ही सौंप चुकी हैं. इसमें राज्य में आर्थिक विकास और सुशासन का मुद्दा शामिल है.

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